
गीतांजली विश्वविद्यालय में गूंजे वैदिक-भक्ति के स्वर, सूर्या गायत्री की प्रस्तुति
गीतांजली विश्वविद्यालय में ‘रामं भजे’ कार्यक्रम में सुर, संस्कार और सेवा का अद्भुत संगम
AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ की रजत जयंती पर उदयपुर में भव्य वैदिक-भक्ति संध्या
सूर्या गायत्री की प्रस्तुति से आध्यात्मिक हुआ परिसर
शास्त्रीय भजनों और वैदिक मंत्रों से भक्तिरस में डूबा विश्वविद्यालय परिसर
विजय श्रीवास्तव,
उदयपुर,dusrikhabar.com। उदयपुर स्थित गीतांजली विश्वविद्यालय में शनिवार सायं आध्यात्मिकता, संस्कृति और सेवा का अद्वितीय संगम देखने को मिला। AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य वैदिक-भक्ति संध्या में सुप्रसिद्ध युवा गायिका सूर्या गायत्री ने “रामं भजे” कार्यक्रम के माध्यम से सभागार को वैदिक मंत्रों और भक्ति संगीत से गुंजायमान कर दिया। यह संध्या केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और सनातन मूल्यों का उत्सव बनकर उभरी।

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दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत, गणेश वंदना से सजी संध्या
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश भजन “महागणपतिम्” से हुआ। इस गरिमामयी आयोजन की अध्यक्षता गीतांजली ग्रुप के चेयरमैन जे.पी. अग्रवाल ने की। इस अवसर पर बी.आर. अग्रवाल, एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल, AIM for Seva एवं आर्ष विद्या तीर्थ से जुड़े संतगण, आचार्यगण, शिक्षाविद् एवं अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब उसमें सेवा-भाव हो : जे.पी. अग्रवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गीतांजली ग्रुप के चेयरमैन जे.पी. अग्रवाल ने कहा कि AIM for Seva एवं आर्ष विद्यातीर्थ द्वारा सुदूर और वंचित अंचलों के बच्चों को संस्कारयुक्त सर्वांगीण शिक्षा देना अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी पूर्ण होती है जब उसमें सेवा-भाव जुड़ा हो, और गीतांजली विश्वविद्यालय इसी भावना के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। वेद-पाठ एवं स्तोत्र-पाठ करते बच्चों को देखकर उन्हें गहन आत्मिक प्रसन्नता हुई।

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उन्होंने इस आयोजन को केवल धार्मिक कार्यक्रम न मानते हुए सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों का उत्सव बताया तथा AIM for Seva की 25 वर्षों की सेवा-यात्रा के लिए बापना साहब, पूज्य स्वामी एवं सभी अतिथियों को साधुवाद दिया। उन्होंने सूर्या गायत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि राम मंदिर स्थापना के समय स्वयं प्रधानमंत्री ने उनके भजनों की सराहना की थी। ऐसे कार्यक्रम आज के सोशल मीडिया युग में सकारात्मक परिवर्तन और नई दिशा देने का कार्य करते हैं।

सूर्या गायत्री: कम उम्र में वैश्विक पहचान की प्रेरणादायक कहानी
26 जनवरी 2006 को केरल के कोझिकोड ज़िले के परम्मेरी गांव में जन्मीं सूर्या गायत्री ने अल्प आयु में ही भक्ति एवं आध्यात्मिक संगीत के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। उनके पिता पी. वी. अनिल कुमार आकाशवाणी के प्रतिष्ठित कलाकार हैं, जबकि माता पी. के. दिव्या एक संवेदनशील कवयित्री हैं। सूर्या गायत्री भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा और क़तर में भी अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। उनके संगीत जीवन का ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री ने उनके द्वारा गाया गया “श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन” सोशल मीडिया पर साझा किया, जो आज भी श्रीराम मंदिर में गूंजता है।

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राम नाम से सराबोर हुआ सभागार, भक्तिरस में डूबे श्रोता
इसके पश्चात सूर्या गायत्री के भजनों ने पूरे सभागार को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। उन्होंने महागणपतिम्, रामं भजे, ठुमक चलत रामचंद्र, राम को देख कर, श्रीरामचंद्र कृपालु, सीतापति संकीर्तन, रघुवर तुमको, मेरे घर राम आए हैं, भारत देश एवं हनुमान चालीसा का अत्यंत भावपूर्ण एवं शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया। प्रत्येक रचना में वैदिक चेतना, भक्ति और संगीत की परिपक्वता स्पष्ट झलक रही थी।
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सेवा, शिक्षा और संस्कृति के केंद्र के रूप में गीतांजली विश्वविद्यालय
पिछले 18 वर्षों से दक्षिण राजस्थान में सक्रिय गीतांजली विश्वविद्यालय एवं गीतांजली ग्रुप न केवल उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं, बल्कि शिक्षा, समाजसेवा और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी जाना जाता है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से विश्वविद्यालय समाज के समग्र विकास में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। गीतांजली विश्वविद्यालय का स्पष्ट विज़न है— “उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा एवं अनुसंधान, आत्मनिर्भर पेशेवरों का निर्माण और किफायती चिकित्सा सेवाएँ।” यह वैदिक-भक्ति संध्या उसी दृष्टि की सशक्त अभिव्यक्ति बनी।
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AIM for Seva के सेवा प्रकल्पों की झलक, संस्कारों से सशक्त हो रहा भविष्य
इस अवसर पर AIM for Seva एवं आर्ष विद्यापीठ के सेवा प्रकल्पों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। पूज्य स्वामी ब्रह्मपरमानंद ने बताया कि छात्रालयों में केवल शरीर का पोषण नहीं, बल्कि चित्त का शोधन होता है। यहां विद्या संस्कार बन जाती है, और विद्यार्थी गीता के श्लोकों से जीवन का अर्थ समझते हैं। वहीं AIM for Seva के CEO सिरनी, जो विशेष रूप से अमेरिका से पधारे, ने बताया कि संस्था के 17 राज्यों में 91 छात्रावास संचालित हैं।
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राजस्थान में जयपुर और उदयपुर में छात्रावास संचालित हैं तथा उदयपुर में स्कूल परियोजना भी क्रियान्वित है। जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों द्वारा शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चार इस बात का प्रमाण है कि सच्चा सेवा-भाव समाज को बदल सकता है।
उदयपुर की पुण्य धरा पर आयोजित यह भव्य वैदिक-भक्ति संध्या गीतांजली विश्वविद्यालय के सेवा, संस्कृति और समाज के प्रति संकल्प का अविस्मरणीय अध्याय बन गई। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर नीरज गुप्ता द्वारा किया गया।
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