
गीतांजली मेडिकल कॉलेज उदयपुर में वर्चुअल डिसेक्शन टेबल का शुभारंभ…
वर्चुअल डिसेक्शन टेबल के माध्यम से 3D तकनीक से छात्र समझेंगे मानव शरीर की जटिल रचना
आधुनिक तकनीक से एनाटॉमी शिक्षा को मिली नई दिशा
UG, PG छात्रों और सर्जिकल टीम को मिलेगा हैंड्स-ऑन अनुभव
गीतांजली मेडिकल कॉलेज बना तकनीक-समर्थ चिकित्सा शिक्षा का केंद्र
उदयपुर, dusrikhabar.com। उदयपुर स्थित गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (GMCH) ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए वर्चुअल डिसेक्शन टेबल (Virtual Dissection Table – VDT) की शुरुआत की है। यह अत्याधुनिक 3D इंटरएक्टिव तकनीक मेडिकल छात्रों को मानव शरीर रचना को गहराई और व्यावहारिकता के साथ समझने में सक्षम बनाएगी।
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वर्चुअल डिसेक्शन टेबल का उद्घाटन करते हुए गीतांजली ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल
एनाटॉमी शिक्षा में तकनीकी क्रांति
एनाटॉमी विभाग में स्थापित यह वर्चुअल डिसेक्शन टेबल दिनांक 02 जनवरी 2026 को शुभारंभ की गई। इसका उद्घाटन गीतांजली ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल द्वारा किया गया। यह तकनीक छात्रों को डिजिटल डिसेक्शन, लेयर-बाय-लेयर अध्ययन और वास्तविक मानव शरीर की संरचना को थ्री-डायमेंशनल रूप में देखने का अवसर प्रदान करेगी।
UG, PG और सर्जिकल टीम को मिलेगा लाभ
इस अत्याधुनिक VDT तकनीक से स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) छात्र और सर्जिकल टीम को पढ़ाई एवं प्रशिक्षण में बड़ा लाभ मिलेगा। पारंपरिक पद्धति के साथ-साथ यह डिजिटल प्लेटफॉर्म छात्रों के लिए सुरक्षित, सटीक और प्रभावी शिक्षण अनुभव सुनिश्चित करेगा।
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“तकनीक के बिना आधुनिक चिकित्सा शिक्षा अधूरी” — अंकित अग्रवाल
इस अवसर पर अंकित अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक समय में चिकित्सा शिक्षा में तकनीक का समावेश अनिवार्य हो गया है।
उन्होंने कहा कि वर्चुअल डिसेक्शन टेबल एनाटॉमी विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिससे विद्यार्थियों को हैंड्स-ऑन लर्निंग और मानव शरीर रचना की गहन समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
वर्चुअल डिसेक्शन क्या है?
वर्चुअल डिसेक्शन एक आधुनिक डिजिटल तकनीक है, जिसमें वास्तविक शवों को काटे बिना मानव शरीर की संरचना का अध्ययन किया जाता है। इसमें हाई-रिज़ॉल्यूशन 3D इमेज, CT स्कैन और MRI डेटा का उपयोग होता है। इस तकनीक से छात्र और डॉक्टर किसी भी अंग को हर कोण से देख सकते हैं, परत-दर-परत संरचना समझ सकते हैं और अंदरूनी हिस्सों का गहन अध्ययन कर सकते हैं। पारंपरिक विच्छेदन की तुलना में यह तरीका अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और प्रभावी माना जाता है।

भारत में वर्चुअल डिसेक्शन का उपयोग और प्रमुख संस्थान
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AIIMS, नई दिल्ली: भारत का पहला डेडिकेटेड वर्चुअल ऑटोप्सी सेंटर यहीं स्थापित है, जहां बिना चीरफाड़ के वर्चुअल पोस्टमॉर्टम किया जाता है। यह तकनीक मेडिकल-लीगल मामलों में बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
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JSS मेडिकल कॉलेज, मैसूर: यहां Anatomage वर्चुअल डिसेक्शन टेबल का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मेडिकल छात्रों को मानव शरीर रचना की डिजिटल और गहरी समझ मिलती है।
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राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर: आयुर्वेद शिक्षा में भी इस 3D वर्चुअल तकनीक को अपनाया गया है, जिससे छात्रों को आधुनिक तरीके से मानव शरीर रचना सिखाई जा रही है।
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अन्य मेडिकल व रिसर्च संस्थान: देश के कई मेडिकल कॉलेज और शोध संस्थान सर्जिकल ट्रेनिंग, चिकित्सा शिक्षा और सर्जरी की पूर्व योजना के लिए वर्चुअल डिसेक्शन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिससे सर्जनों को वर्चुअल अभ्यास का अवसर मिलता है।
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वर्चुअल डिसेक्शन के मुख्य लाभ
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सुरक्षित और नैतिक: शवों के उपयोग से जुड़ी स्वास्थ्य जोखिम और नैतिक असहजता को समाप्त करता है।
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बेहतर समझ: 3D विज़ुअलाइज़ेशन से जटिल अंगों और प्रणालियों को आसानी से समझा जा सकता है।
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अनुसंधान और नवाचार: नई सर्जिकल तकनीकों और चिकित्सा उपकरणों के परीक्षण में सहायक।
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नैदानिक कौशल में वृद्धि: छात्रों को CT स्कैन और MRI रिपोर्ट की व्याख्या करने में दक्ष बनाता है।

क्यों है यह चिकित्सा शिक्षा का भविष्य?
डिजिटल तकनीक से लैस वर्चुअल डिसेक्शन टेबल चिकित्सा शिक्षा को अधिक प्रभावी, सटीक और आधुनिक बना रही है। यह तकनीक आने वाले समय में मेडिकल ट्रेनिंग का नया मानक बनने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
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गरिमामयी उपस्थिति और अकादमिक समर्थन
कार्यक्रम में माननीय कुलपति डॉ. राकेश कुमार व्यास, वाइस प्रेसिडेंट सीए संदीप कुणावत, डीन डॉ. संगीता गुप्ता सहित कॉलेज के अनेक वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, स्टाफ और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को चिकित्सा शिक्षा के भविष्य की दिशा में सशक्त कदम बताया।
चिकित्सा शिक्षा में अग्रणी बनता गीतांजली मेडिकल कॉलेज
इस नई सुविधा के शुभारंभ के साथ गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मेडिकल एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यह पहल न केवल छात्रों के लिए लाभकारी है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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