
लंग कैंसर और TB के लिए ब्रोंकोस्कोपी से इतर EBUS तकनीक बनी संजीवनी.!
गीतांजली हॉस्पिटल उदयपुर में EBUS से जटिल लंग कैंसर और टीबी का सटीक निदान
जहां सामान्य ब्रोंकोस्कोपी असफल, वहां EBUS तकनीक बनी उम्मीद की किरण
छिपे हुए लंग कैंसर और टीबी का खुलासा, सही स्टेज पर शुरू हुआ इलाज
कम केंद्रों पर उपलब्ध उन्नत तकनीक अब गीतांजली मेडिकल कॉलेज में सफलतापूर्वक लागू
सुश्री सोनिया,
उदयपुर,dusrikhabar.com। फेफड़ों से जुड़ी गंभीर और जटिल बीमारियों के निदान में गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां EBUS (एंडोब्रोंकियल अल्ट्रासाउंड ब्रोंकोस्कोपी) की मदद से कई ऐसे मामलों में लंग कैंसर और लंग टीबी का सफल निदान किया गया, जहां सामान्य ब्रोंकोस्कोपी असफल रही थी। इस एडवांस्ड तकनीक से मरीजों को समय पर सही इलाज मिल पाया और उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ।
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क्या है EBUS तकनीक?
EBUS Bronchoscopy एक अत्याधुनिक, मिनिमली इनवेसिव और अत्यधिक सटीक जांच पद्धति है। इसमें ब्रोंकोस्कोप के सिरे पर अल्ट्रासाउंड लगाया जाता है, जिससे डॉक्टर एयरवे के बाहर मौजूद लिम्फ नोड्स और छिपे हुए घावों (lesions) तक भी पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि जहां साधारण ब्रोंकोस्कोपी नहीं पहुंच पाती, वहां EBUS समाधान देता है।
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EBUS क्यों है जरूरी?
सामान्य ब्रोंकोस्कोपी केवल श्वास नली के अंदर की स्थिति दिखा पाती है, जबकि कई बार कैंसर, टीबी या लिम्फ नोड्स की बीमारी एयरवे के बाहर होती है। EBUS की अल्ट्रासाउंड तकनीक ऐसे छिपे हुए रोगों को स्पष्ट रूप से दिखाकर सटीक निदान संभव बनाती है।

गीतांजली में EBUS से मिले जीवन बदलने वाले परिणाम
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कई मरीजों में सामान्य जांचों से लंग कैंसर का पता नहीं चल पाया था, लेकिन EBUS से बीमारी सही स्टेज पर पकड़ी गई, जिससे तुरंत इलाज शुरू हो सका।
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दो मरीजों में साधारण जांचों में टीबी नहीं दिखी, पर EBUS से लिम्फ नोड्स में छुपी TB सामने आई। अब दोनों मरीजों का उपचार चल रहा है और वे तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं।
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EBUS किन बीमारियों का करता है पता?
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शुरुआती चरण का लंग कैंसर
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ट्यूबरकुलोसिस (TB)
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सारकॉइडोसिस
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लिम्फोमा
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अन्य जटिल फेफड़ों और श्वसन तंत्र की बीमारियाँ
साथ ही, लंग कैंसर की स्टेजिंग में भी EBUS बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
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भारत में चुनिंदा केंद्रों पर उपलब्ध तकनीक
यह उन्नत जांच पद्धति भारत में बहुत कम चिकित्सा केंद्रों पर उपलब्ध है, लेकिन अब गीतांजली हॉस्पिटल में इसका सफल उपयोग किया जा रहा है। यहां EBUS की मदद से कई कठिन और जटिल मामलों का सटीक निदान कर मरीजों को नई उम्मीद दी जा रही है।
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