
मेवाड़ यूनिवर्सिटी में संघर्ष जारी: फर्जी डिग्रियों पर नर्सिंग छात्रों का उग्र प्रदर्शन, ABVP भी मैदान में
मेवाड़ यूनिवर्सिटी में 15 दिनों से छात्रों का जारी आंदोलन,
मेवाड़ यूनिवर्सिटी की मान्यता पर उठे गंभीर सवाल
छात्रों का आरोप – फर्जी दस्तावेज दिखाकर दिया गया एडमिशन
सरकार से मान्यता ही नहीं यूनिवर्सिटी के पास डिग्री की
माइग्रेशन और फीस वापसी की मांग, कक्षाएं व परीक्षाएं स्थगित्र
नवीन सक्सेना,
चित्तौड़गढ़, dusrikhabar.com। गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग और जीएनएम कोर्स की मान्यता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पिछले 15 दिनों से छात्र लगातार धरने पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रवेश के समय उन्हें राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) की मान्यता होने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन बाद में पता चला कि कोर्स के लिए कोई वैध अनुमति उपलब्ध नहीं है। अब इस आंदोलन को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का समर्थन भी मिल गया है, जिससे मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
मान्यता विवाद से भड़का छात्र आक्रोश
छात्रों के अनुसार, सत्र 2022-23 में एडमिशन के दौरान स्पष्ट रूप से बताया गया था कि नर्सिंग कोर्स को संबंधित काउंसिल की स्वीकृति प्राप्त है। लेकिन एक वर्ष बाद उन्हें जानकारी मिली कि कोर्स के लिए किसी भी काउंसिल से मान्यता नहीं ली गई है।
बीएससी नर्सिंग की छात्रा पायल पाटिल ने आरोप लगाया कि जब इस बारे में प्रबंधन से सवाल किया गया तो कथित रूप से शपथ पत्र दिखाकर यह आश्वासन दिया गया कि जल्द ही मान्यता मिल जाएगी। अब स्थिति यह है कि छात्र फाइनल ईयर में पहुंच चुके हैं और परीक्षा में केवल एक महीना शेष है, लेकिन अभी तक नर्सिंग मान्यता विवाद का कोई समाधान नहीं निकला है।
छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने संबंधित कार्यालयों में जानकारी जुटाई तो वहां से बताया गया कि यूनिवर्सिटी की कोई फाइल जमा ही नहीं हुई है। कुछ विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक शिकायत पहुंचाई, साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एबीवीपी का समर्थन, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
लगातार चल रहे मेवाड़ यूनिवर्सिटी छात्र आंदोलन को अब एबीवीपी का समर्थन मिल गया है। परिषद कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि छात्रों के साथ धोखा हुआ है तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
छात्रों का आरोप है कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है और प्रशासन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा। बढ़ते दबाव के बीच यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
माइग्रेशन और फीस रिफंड की मांग तेज
करीब 120 छात्रों ने मांग की है कि उन्हें किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में उसी सेमेस्टर और शैक्षणिक वर्ष में ट्रांसफर किया जाए ताकि उनका साल खराब न हो। साथ ही भारी-भरकम फीस और डोनेशन की राशि वापस की जाए।
नर्सिंग छात्र रोहित मारू ने आरोप लगाया कि उनसे एक से डेढ़ लाख रुपए तक डोनेशन लिया गया। इधर बढ़ते विरोध के चलते यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अगली सूचना तक सभी कक्षाएं और चार परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं।
प्रशासन का कहना है कि बीएससी नर्सिंग मान्यता से संबंधित फाइल जयपुर स्तर पर लंबित है और मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। हालांकि छात्र इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब वे जयपुर गए तो संबंधित विभागों ने ऐसी किसी फाइल के अस्तित्व से इनकार कर दिया।
फिलहाल मेवाड़ यूनिवर्सिटी विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है और सभी की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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