
बजट बजट 2026-27: राजस्थान के पर्यटन को वैश्विक ऊंचाई का मास्टरप्लान…
2047 विजन: वैश्विक, ग्रामीण और इको-टूरिज्म हब बनेगा राजस्थान
बजट में जैसलमेर से भरतपुर और श्रीगंगानगर से बांसवाड़ा तक विकास की बौछार
हेरिटेज वॉक-वे, रोप-वे, कन्वेंशन सेंटर और अल्ट्रा लक्जरी टूरिज्म ज़ोन की बड़ी घोषणाएं
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़ता समग्र पर्यटन मॉडल
नवीन सक्सेना,
जयपुर, dusrikhabar.com। प्रदेश की उपमुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री दिया कुमारी ने वर्ष 2026-27 के बजट में पर्यटन, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखते हुए एक व्यापक और दूरदर्शी विकास रोडमैप प्रस्तुत किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक राजस्थान को वैश्विक, ग्रामीण और इको-टूरिज्म के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी लक्ष्य के तहत पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, हैरिटेज संरक्षण, धार्मिक स्थलों के उन्नयन और आधुनिक अवसंरचना निर्माण के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।
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तनोट-जैसलमेर से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक
पर्यटन एवं धार्मिक आस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण तनोट-जैसलमेर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए व्यापक कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, पर्यटक सुविधा केंद्र, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था, ठहराव सुविधाओं का विस्तार और क्षेत्रीय नियोजन शामिल होगा। सीमावर्ती क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाने की तैयारी है।
पुष्कर से चित्तौड़गढ़ तक 30 करोड़ के हेरिटेज वॉक-वे
राज्य के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक नगरों पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, केशवरायपाटन, डीग और चित्तौड़गढ़ में 30 करोड़ रुपये की लागत से हेरिटेज वॉक-वे विकसित किए जाएंगे। इनसे पर्यटक शहरों की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन स्थापत्य का व्यवस्थित अनुभव कर सकेंगे।
इसके साथ ही पुष्कर, खाटूश्यामजी, देशनोक, पोकरण, डिग्गी और मंडावा में मुख्य प्रवेश मार्गों को मॉडल रोड के रूप में विकसित कर 30 करोड़ रुपये से सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
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आमेर बनेगा इंटरनेशनल टूरिज्म मॉडल
जयपुर स्थित आमेर किला और आमेर कस्बे में 50 करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी। डिजिटल म्यूजियम, आधुनिक साइनज सिस्टम, आकर्षक लाइटिंग, उन्नत पार्किंग और पर्यटक मार्गदर्शन प्रणाली से आमेर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मॉडल बनाया जाएगा।
जैसलमेर के खुडी क्षेत्र में अल्ट्रा लक्जरी स्पेशल टूरिज्म ज़ोन (STZ) विकसित होगा, जबकि कुलधरा में पर्यटक सुविधा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे डेजर्ट टूरिज्म को नई दिशा मिलेगी।
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भरतपुर में 100 करोड़ का ब्रज कन्वेंशन सेंटर
भरतपुर में 100 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ब्रज कन्वेंशन सेंटर का निर्माण होगा। यह धार्मिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराएगा। साथ ही राज्य की प्राचीन बावड़ियों के जीर्णोद्धार का निर्णय भी लिया गया है।
शेखावाटी बनेगा अंतरराष्ट्रीय हेरिटेज सर्किट
झुंझुनूं, चूरू और सीकर में 660 से अधिक चिन्हित हवेलियों के फसाड सुधार, हेरिटेज स्ट्रीट फर्नीचर और स्वच्छता सुविधाओं का विकास किया जाएगा। हवेली स्वामियों को पर्यटन इकाई विकसित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। अगले दो वर्षों में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
झुंझुनूं में वार म्यूजियम की स्थापना और जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर व जालौर को शामिल करते हुए थार सांस्कृतिक सर्किट बनाया जाएगा।
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धरोहर संरक्षण और पैनोरमा निर्माण
गढ़ पैलेस (झालावाड़), किराड़ू मंदिर (बाड़मेर), सरवाड़, किला अजमेर और सुनहरी कोठी (टोंक) सहित अन्य स्थलों पर 18 करोड़ रुपये से संरक्षण कार्य होंगे। बांदीकुई (संत दुर्बलनाथ), सिवाना-बालोतरा (वीर दुर्गादास), सलूम्बर (हाड़ी रानी), खरनाल (वीर तेजाजी) और एमडीएसयू अजमेर में महर्षि दयानंद पैनोरमा का निर्माण होगा।
रोप-वे, रिंग रोड और धार्मिक विकास
राजसमंद में अन्नपूर्णा माताजी मंदिर परिसर विकास, दयाशाह किले और द्वारकाधीश मंदिर तक रोप-वे व एलिवेटेड रिंग रोड का अध्ययन होगा। रायसर (जयपुर) स्थित बाकी माता मंदिर में रोप-वे बनेगा। फूलदेवरा महादेव, नईनाथ धाम, चामंडा माता, कदमखंडी धाम, झरनेश्वर महादेव, कुलोद माता, मां उष्ट्रवाहिनी, घाटेश्वर महादेव, करूणाणमूर्ति धाम, मरकंडी माता और पलासिया धाम सहित अनेक मंदिरों में विकास कार्य होंगे।
ग्रामीण पर्यटन, सुरक्षा और एयर कनेक्टिविटी
होम-स्टे संचालकों को बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान और हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण दिया जाएगा। टूरिज्म असिस्टेंस फोर्स (TAF) को सुदृढ़ कर महिला सुरक्षाकर्मी और गाइड नियुक्त किए जाएंगे। देवस्थान विभाग की धर्मशालाओं के लिए नई BOT नीति लाई जाएगी। सीकर-झुंझुनूं और भरतपुर-डीग में नए हवाई अड्डों के अध्ययन, सवाई माधोपुर और बांसवाड़ा में फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन स्थापित किए जाएंगे।
पर्यटन से रोजगार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
यह बजट पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रखकर धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आधुनिक अवसंरचना और वैश्विक ब्रांडिंग से जोड़ता है। सरकार का मानना है कि प्रभावी क्रियान्वयन से स्थानीय रोजगार, व्यापार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नया आयाम मिलेगा।
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