देशभर में गरजा भारतीय मज़दूर संघ, पीएम के नाम सौंपे ज्ञापन

देशभर में गरजा भारतीय मज़दूर संघ, पीएम के नाम सौंपे ज्ञापन

भारतीय मज़दूर संघ का 25 फरवरी को ‘विरोध दिवस’

37 जिलों में रैली-धरना, हजारों श्रमिकों की भागीदारी

जयपुर में जिलाधीश कार्यालय पर प्रदर्शन, नेताओं ने किया संबोधन

वेतन, पेंशन, नियमितीकरण और श्रम कानूनों पर सरकार से ठोस फैसले की मांग

महावीर,

जयपुर/नई दिल्ली, dusrikhabar.com। के आह्वान पर 25 फरवरी को पूरे देश में मनाया गया। पुरी, ओडिशा में आयोजित 21वें अखिल भारतीय अधिवेशन के निर्णय के तहत संघ से जुड़े श्रमिकों, कर्मचारियों और मातृशक्ति ने जिला कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे। राजस्थान सहित देशभर के जिला मुख्यालयों पर रैली, धरना और प्रदर्शन कर सरकार से लंबित श्रमिक मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई।

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राजस्थान के 37 जिलों में आंदोलन, हजारों की भागीदारी

राजस्थान के 37 जिलों में आयोजित किए गए। हजारों कर्मचारी और श्रमिक सड़कों पर उतरे और जिलाधीशों को ज्ञापन सौंपे। विभिन्न महासंघों ने भी अपने-अपने स्तर पर अलग से ज्ञापन प्रस्तुत कर श्रमिक वर्ग की समस्याओं को उठाया।

जयपुर में सुबह 11 बजे जिलाधीश कार्यालय पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और पदाधिकारी एकत्रित हुए। प्रदेश महामंत्री हरि मोहन शर्मा और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिकों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नारेबाजी और प्रदर्शन के बाद जिलाधीश के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।

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लंबित मुद्दों पर सरकार की चुप्पी से नाराज़गी

का कहना है कि उसने समय-समय पर सरकार के समक्ष कई ज्वलंत मुद्दे उठाए, लेकिन अब तक अपेक्षित सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लिए गए।

  • लाखों आज भी बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं।

  • पांच दशकों की सेवा के बाद भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘योजना कर्मी’ का दर्जा ही दिया जा रहा है, जबकि उनसे 10 घंटे से अधिक कार्य लिया जा रहा है।

  • आठ राज्यों में की मिलों के श्रमिकों को महामारी के बाद से केवल 50% वेतन मिल रहा है और दस माह से वेतन बकाया है।

  • रांची स्थित के कर्मचारियों को 32 महीनों से वेतन नहीं मिला।

  • देशभर के विद्युत कर्मचारी डिस्कॉम के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।

  • इसके तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपए पर ही स्थिर है।

  • बैंक कर्मचारी पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं।

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प्रमुख मांगें: पेंशन बढ़ोतरी से नियमितीकरण तक

विरोध दिवस के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुख मांगें शामिल हैं—

◼️ सभी क्षेत्रों में ।
◼️ औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता, 2020 में श्रमिक हितों की सुरक्षा।
◼️ को 1,000 से बढ़ाकर 7,500 रुपए प्रतिमाह करना और महंगाई राहत देना।
◼️ ईएसआईसी की वेतन सीमा 21,000 से बढ़ाकर 42,000 तथा वीजीपीएफ सीमा 15,000 से बढ़ाकर 30,000 करना।
◼️ भुगतान बोनस अधिनियम, 1965 के तहत बोनस पात्रता सीमा में वृद्धि।
◼️ विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 133 के अनुरूप त्रिपक्षीय समझौतों को लागू करना।
◼️ योजना एवं संविदा कर्मियों का नियमितीकरण।
◼️ सामान्य भर्ती पर लगे प्रतिबंध को हटाकर रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित करना।

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सरकार से शीघ्र निर्णय की अपील

ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे श्रमिकों के हितों और राष्ट्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए इन लंबित मांगों पर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लें। संगठन का कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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