जयपुर में 78वें सेना दिवस के अवसर पर SMS स्टेडियम शौर्य संध्या तक राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

जयपुर में 78वें सेना दिवस के अवसर पर SMS स्टेडियम शौर्य संध्या तक राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम

जयपुर प्रेरणा स्थल पर 78वां सेना दिवस परेड का ऐतिहासिक आयोजन, तकनीक और शक्ति का प्रदर्शन

जयपुर में पहली बार आम नागरिकों के लिए महल रोड पर परेड, आधुनिक हथियारों की झलक

SMS स्टेडियम में शौर्य संध्या समारोह–राजनाथ सिंह और भजनलाल शर्मा ने साझा किया संदेश

ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं, आतंकी सोच के खात्मे तक शांति के प्रयास रहेंगे जारी,

राजस्थान की धरती ने भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया – केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर ने गुरुवार को 78वां सेना दिवस अत्यंत भव्य और ऐतिहासिक रूप से मनाया गया। दिन भर में प्रेरणा स्थल से शुरू होकर महल रोड पर आयोजित सेना दिवस परेड ने भारतीय सेना की शौर्य, तकनीक और उन्नत युद्ध क्षमताओं को प्रदर्शित किया। दिन के समापन पर जयपुर के SMS स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या समारोह में केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सेना की वीरता, बलिदान और राष्ट्रीय सुरक्षा पर अपने विचार साझा किए।

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना दिवस मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले जवानों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अप्रतिम बलिदान की गाथा को स्मरण करने का दिन है। इन्हीं के कारण आज पूरा भारत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कण-कण में वीरता की गाथाएं समाई हैं। शौर्य, पराक्रम और त्याग की अमर कहानियों से यहां का इतिहास भरा हुआ है। राजस्थान की धरती ने हमेशा भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है एवं इसे शक्ति तथा गरिमा भी प्रदान की है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार को 78वें सेना दिवस के अवसर पर सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान के वीरों ने सदियों से भारत माता की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी है। महाराणा प्रताप की तलवार, राणा सांगा का शौर्य, पन्नाधाय का त्याग, मीराबाई की भक्ति और भामाशाह की संपत्ति—इस पावन भूमि ने हर युग में अद्वितीय पुरुषार्थ का परिचय दिया है।

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शौर्य भूमि पर शौर्य संध्या, वीर सैनिकों को सच्ची श्रद्धांजलि

रक्षा मंत्री ने कहा कि राजस्थान के सभी समुदायों के वीरों ने भारतीय सेना में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज भी यहां के युवा सैनिक सेना की विभिन्न रेजिमेंट्स में सेवा देकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ऐतिहासिक किले, महल और स्मारक सदियों से सैन्य रणनीति, साहस और पराक्रम के प्रतीक रहे हैं। ऐसी शौर्य भूमि पर शौर्य संध्या का आयोजन, वीर सैनिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

15 जनवरी: स्वाभिमान और स्वाधीनता का प्रतीक दिवस

राजनाथ सिंह ने कहा कि 15 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। वर्ष 1949 में जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार संभाला। यह घटना औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और स्वाधीनता का प्रतीक थी। तब से लेकर आज तक सेना दिवस हमारे लिए संकल्प और प्रेरणा का दिवस बना हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर: सैन्य शक्ति के साथ राष्ट्रीय स्वभाव का प्रदर्शन

रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना दिवस आत्ममंथन का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने केवल अपनी सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय चरित्र का भी परिचय दिया। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी रणनीति, संयम और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई।

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ऑपरेशन सिंदूर रहेगा साहस और संतुलन का प्रतीक

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास में सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि साहस और संतुलन के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा। यह अभियान अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जब तक आतंकी सोच का अंत नहीं होता, तब तक शांति के लिए प्रयास जारी रहेंगे—यह संदेश उन्होंने राजस्थान की धरती से दिया।

भारतीय सैनिक: योद्धा ही नहीं, दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिक केवल योद्धा नहीं होता, बल्कि दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी होता है। सैनिक का जीवन दर्शन “सेवा परमो धर्मः” पर आधारित होता है। वह अपना सर्वस्व त्यागकर राष्ट्र सेवा को समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि सैनिक दुश्मन के प्रति कठोर, लेकिन आत्मसमर्पण कर चुके शत्रु और पीड़ित नागरिकों के प्रति करुणामय होता है।

निस्वार्थ सेवा का सर्वोच्च आदर्श है सैनिक का जीवन

रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक का कर्तव्य उसके लिए यज्ञ के समान होता है और उसका त्याग आहुति। सैनिक जानता है कि उसके कर्मों का फल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि के रूप में मिलता है। यह वही निस्वार्थ सेवा है जिसकी कल्पना हमारे ऋषियों ने की थी। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से सैनिक के जीवन से यह गुण सीखने की अपील की।

सेना युवाओं को देश के लिए जीना सिखाती है

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिक का संबंध केवल युद्ध से नहीं, बल्कि उसकी निरंतर तैयारी से भी होता है। जब एक साधारण युवा सेना में प्रवेश करता है, तो उसमें क्रांतिकारी परिवर्तन आते हैं। सेना उसे स्वयं से पहले देश के लिए जीना सिखाती है, समय का महत्व, शारीरिक सहनशक्ति, कठिन परिस्थितियों में ढलने की क्षमता और टीमवर्क का पाठ पढ़ाती है।

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प्रेरणा स्थल से परेड का भव्य आगाज़, शक्ति और आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन

SMS  स्टेडियम में शौर्य संध्या से पूर्व जयपुर के प्रेरणा स्थल पर पुष्पांजलि समारोह के साथ 78वें सेना दिवस परेड की शुरुआत हुई, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

यह आयोजन दर्शाता है कि भारतीय सेना का शौर्य और बलिदान हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। जनता ने उत्साहपूर्वक परेड को देखा, जिसमें आधुनिक टंक, हेलीकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल और स्वदेशी युद्ध तकनीकों सहित कई उन्नत हथियारों का प्रदर्शन हुआ। परेड को एक लाख से अधिक नागरिकों ने देखा, जिससे सेना और जनता के बीच अटूट विश्वास स्पष्ट हुआ।

महल रोड पर इतिहास रचा गया–पहली बार आम लोगों के लिए खुली परेड

इस वर्ष 78वें सेना दिवस परेड को महल रोड पर आयोजित किया गया, जो सेना छावनी से बाहर आयोजित होने वाला यह एक ऐतिहासिक कदम है। इस परेड में सात विशिष्ट सैन्य टुकड़ियों के साथ एनसीसी गर्ल्स, भैरव बटालियन, और विभिन्न रेजिमेंट्स ने मार्च-पास परेड दिखाई। आधुनिक युद्ध उपकरणों में टी-90 टैंक, अर्जुन टैंक, ड्रोन सिस्टम और अन्य उन्नत प्रणाली शामिल थीं, जो भारत के आत्मनिर्भर रक्षा प्रयासों का प्रतीक मानी जा रही हैं।

SMS स्टेडियम में शौर्य संध्या–सलामी, कला, ड्रोन शो और संदेश

शाम को SMS स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम में केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जनता को संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने ‘भारतीय सेना-शौर्य एवं बलिदान की परंपरा’ पर आधारित स्पेशल कवर का अनावरण किया और प्रोजेक्ट नमन के तहत सूरतगढ़ में 100वें नमन सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया।

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कार्यक्रम में सेना बैंड, मलखंभ, कलारीपयट्टू जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ ऑपरेशन सिंदूर का नाट्य मंचन और भव्य ड्रोन शो का आयोजन हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना दुनिया के लिए शांति दूत बनने की दिशा में अग्रसर है तथा 2047 तक इसे दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने के लक्ष्य पर काम किया जा रहा है।

अपडेट जारी हैं…..

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