
DRT जयपुर में पीठ-बार के बीच बेहतर समन्वय से ही पीड़ितों को मिलेगा शीघ्र न्याय: जस्टिस सुधीर कुमार जैन
‘रीइमैजिनिंग रिकवरी, रिइनफोर्सिंग जस्टिस’ पुस्तक का अनावरण
डीआरटी जयपुर के पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता के कार्यों की सराहना
अधिवक्ताओं के साथ न्यायिक प्रक्रिया और वैकल्पिक विवाद समाधान पर संवाद
युवा अधिवक्ताओं की भूमिका और संस्थागत सहयोग पर चर्चा
माही राठौड़,
जयपुर,dusrikhabar.com। डीआरटी बार एसोसिएशन, जयपुर की ओर से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, जयपुर में विशेष संवाद एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डेब्ट्स रिकवरी अपीलेट ट्रिब्यूनल (डीआरएटी), दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने शिरकत की। उन्होंने अधिवक्ताओं के साथ न्यायिक प्रक्रिया, संस्थागत कार्यप्रणाली और मामलों के शीघ्र निस्तारण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया।
जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने कहा कि डीआरटी से जुड़े मामलों में पीड़ितों को प्रभावी और समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए पीठ और बार एसोसिएशन के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने पेशेवर अनुशासन, संस्थागत सहयोग और समाधानपरक दृष्टिकोण को न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
डीआरटी जयपुर के पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता के कार्यों की सराहना
कार्यक्रम के दौरान डीआरएटी दिल्ली के चेयरपर्सन डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन ने डीआरटी जयपुर के पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने न्यायिक प्रशासन और संस्थागत कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को सकारात्मक बताया।
उन्होंने कहा कि मामलों के प्रभावी निस्तारण के साथ-साथ वैकल्पिक विवाद समाधान, लोक अदालतों और बार सहित विभिन्न हितधारकों के सहयोग से न्यायिक संस्थाओं की कार्यक्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि किसी भी न्यायिक संस्था की प्रभावशीलता केवल पीठ के प्रयासों से नहीं, बल्कि पीठ, बार और संबंधित संस्थानों के सामूहिक सहयोग से बढ़ती है।
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अधिवक्ताओं के साथ इंटरैक्टिव सेशन में न्यायिक प्रक्रिया पर चर्चा
समारोह का प्रमुख आकर्षण डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन और अधिवक्ताओं के बीच आयोजित इंटरैक्टिव सेशन रहा। इस दौरान डीआरटी और डीआरएटी से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया, अधिवक्ताओं के पेशेवर व्यवहार, वैकल्पिक विवाद समाधान और संस्थागत सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा युवा अधिवक्ताओं की भूमिका को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिवक्ताओं को जस्टिस जैन से सीधे सवाल पूछने और उनके न्यायिक अनुभव से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।
इस संवाद के दौरान मामलों के निस्तारण में समाधानपरक सोच, पेशेवर अनुशासन और सभी संबंधित पक्षों के सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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‘रीइमैजिनिंग रिकवरी, रिइनफोर्सिंग जस्टिस’ पुस्तक का अनावरण
कार्यक्रम में डीआरटी जयपुर की संस्थागत यात्रा और पीठासीन अधिकारी विमल गुप्ता के कार्यकाल के दौरान किए गए विभिन्न प्रयासों पर आधारित विशेष प्रकाशन ‘रीइमैजिनिंग रिकवरी, रिइनफोर्सिंग जस्टिस – ए जर्नी ऑफ रिफॉर्म, इनोवेशन एंड जस्टिस’ का अनावरण किया गया।
इस प्रकाशन में डीआरटी जयपुर में न्यायिक प्रशासन, तकनीक के उपयोग, लोक अदालतों, वैकल्पिक विवाद समाधान, युवा अधिवक्ताओं की भागीदारी और बार-बेंच सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही बैंकों, एनबीएफसी, एचएफसी और एआरसी सहित वित्तीय क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता तथा संस्थागत स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को भी प्रकाशन में स्थान दिया गया है।
बार-बेंच समन्वय और पेशेवर अनुशासन को बताया जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बार और बेंच के बीच सकारात्मक एवं रचनात्मक सहयोग न्याय वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डीआरटी से जुड़े मामलों में समयबद्ध निस्तारण के लिए अधिवक्ताओं, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
वक्ताओं ने पेशेवर अनुशासन, संस्थागत प्रतिबद्धता और वैकल्पिक विवाद समाधान को प्रभावी न्यायिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया।
डीआरटी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने संभाली आयोजन की जिम्मेदारी
कार्यक्रम का आयोजन डीआरटी बार एसोसिएशन, जयपुर की अध्यक्ष कीर्ति कपूर, महासचिव राजकुमार तथा डीआरटी स्पेशल लोक अदालत कन्वीनर अनिल शर्मा सहित एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों के सहयोग से किया गया।
इस अवसर पर डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन का अभिनंदन और सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के साथ बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
एसोसिएशन पदाधिकारियों ने जस्टिस जैन की उपस्थिति और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रम विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं को वरिष्ठ न्यायिक अनुभव से सीखने और न्यायिक संस्थाओं के बेहतर संचालन में अपनी भूमिका समझने का अवसर देते हैं।
रात्रिभोज में भी जारी रहा संवाद
कार्यक्रम के बाद कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित रात्रिभोज के दौरान भी बार के सदस्यों और डॉ. जस्टिस सुधीर कुमार जैन सहित अन्य अतिथियों के बीच अनौपचारिक संवाद हुआ। इस दौरान न्यायिक और संस्थागत विषयों पर सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा हुई।
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