बीकानेर डिलीवरी कांड की जांच तेज: जोधपुर मेडिकल कॉलेज की टीम ने प्रसूताओं से की बातचीत, इलाज और इंजेक्शनों की पड़ताल शुरू

बीकानेर डिलीवरी कांड की जांच तेज: जोधपुर मेडिकल कॉलेज की टीम ने प्रसूताओं से की बातचीत, इलाज और इंजेक्शनों की पड़ताल शुरू

बीकानेर पहुंची विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, प्रसूताओं के इलाज-स्वास्थ्य स्थिति की कर रही जांच

डिलीवरी के दौरान दिए गए इंजेक्शन और उपचार प्रक्रिया की होगी गहन पड़ताल

किडनी फेल होने के कारणों की तलाश जारी, बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका पर फोकस

माही राठौड़,

जोधपुर,dusrikhabar.com। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल होने की गंभीर घटना ने पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क कर दिया है। इस मामले की जांच के लिए जोधपुर मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम बीकानेर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने भर्ती प्रसूताओं से सीधे बातचीत कर उनके इलाज, दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जानकारी जुटाई। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों की चिंता बढ़ाई है, बल्कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और उपचार प्रक्रियाओं की निगरानी को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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बीकानेर पहुंची विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, प्रसूताओं से की सीधी बातचीत

जोधपुर मेडिकल कॉलेज की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम मंगलवार को बीकानेर पहुंची। टीम ने पोस्ट कोविड आईसीयू और अन्य वार्डों में भर्ती महिलाओं से मुलाकात कर उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और उपचार प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। डॉक्टरों ने मरीजों और उनके परिजनों की बात भी सुनी ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति समझी जा सके।

इलाज, इंजेक्शन और मेडिकल रिकॉर्ड की हो रही गहन जांच

जांच टीम ने अस्पताल प्रशासन से महिलाओं को दिए गए इंजेक्शन, दवाओं और उपचार से जुड़े सभी दस्तावेज प्राप्त किए। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि डिलीवरी के दौरान और उसके बाद कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई गईं तथा कहीं किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही या तकनीकी त्रुटि तो नहीं हुई।

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माइक्रोबायोलॉजिस्ट से लेकर नेफ्रोलॉजिस्ट तक, कई विशेषज्ञ शामिल

मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा के अनुसार जांच दल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट, फिजिशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट, पीएसएम विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। बहु-विषयक टीम का उद्देश्य मामले की हर पहलू से जांच कर वास्तविक कारणों तक पहुंचना है।

कोटा और बीकानेर के बाद प्रदेशभर के अस्पतालों पर बढ़ी निगरानी

कोटा में सामने आए समान मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग पहले से ही सतर्क था। अब बीकानेर की घटना के बाद जोधपुर सहित अन्य जिलों के अस्पतालों से भी प्रसूताओं की स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कहीं और ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

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बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका, रिपोर्ट का इंतजार

प्रारंभिक स्तर पर बैक्टीरियल संक्रमण को संभावित कारण माना जा रहा है। डॉ. बीएस जोधा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के मौसम में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जोधपुर के सरकारी अस्पतालों में सभी चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

क्या है पूरा मामला?

10 से 15 दिन पहले हुआ था प्रसव, बाद में अचानक बिगड़ी सेहत

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रभावित सभी महिलाओं की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच है। इन महिलाओं का प्रसव करीब 10 से 15 दिन पहले पीबीएम अस्पताल के जनाना विभाग में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए कराया गया था। डिलीवरी के बाद शुरुआती दिनों में सभी महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति सामान्य थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। हालांकि कुछ दिनों बाद एक-एक कर सभी महिलाओं की तबीयत खराब होने लगी। इनमें दिखाई दिए लक्षणों ने चिकित्सकों की चिंता बढ़ा दी और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई।

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कोटा की घटना जैसी आशंका ने बढ़ाई चिंता

बीकानेर में सामने आए इस घटनाक्रम ने हाल ही में कोटा के सरकारी अस्पताल में हुए मामले की यादें ताजा कर दी हैं। वहां भी सिजेरियन डिलीवरी के बाद कई महिलाओं में गंभीर संक्रमण, पेशाब रुकने और किडनी संबंधी जटिलताओं की शिकायतें सामने आई थीं। उस मामले में 13 दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच में अस्पताल से जुड़े संक्रमण को संभावित कारण माना गया था, हालांकि जांच अभी भी जारी है। अब बीकानेर में भी इसी तरह के मामले सामने आने से प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और संक्रमण नियंत्रण उपायों पर सवाल उठने लगे हैं।

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