
पटाखा फेक्ट्री में आग, बच्चे सहित 4 लोग जिंदा जले, चीखते रहे पीड़ित देखते रहे लोग, मानवता तार-तार…
जयपुर अग्निकांड: रिहायशी इलाके में अवैध पटाखा गोदाम बना मौत का कुआ
एक बच्चे समेत 4 लोगों की झुलसने से दर्दनाक मौत
रिहायशी इलाके में अवैध पटाखा गोदाम बना मौत का कारण
आग में झुलसे मजदूरों की हालत गंभीर, लोगों को बचाने में एक स्थानीय युवक भी हुआ घायल
हादसे के बाद उठे बड़े सवाल, अवैध गोदाम और प्रशासनिक लापरवाही की होगी जांच
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुआ भीषण अग्निकांड कई परिवारों की जिंदगी में कभी न भरने वाला घाव छोड़ गया। झुलसते हुए लोग फैक्ट्री से बाहर निकले चीखते पुकारते रहे लेकिन किसी ने उनकी आग नहीं बुझाई, जलते हुए लोग इधर उधर भागकर लोगों से गुहार लगाते रहे। जयपुर में हुई इस घटना ने मानवता को तार तार कर दिया। मानो ऐसा लग रहा है जैसे अहसास खत्म हो गए, मानवता मर गई हो।
रिहायशी इलाके में संचालित एक अवैध पटाखा गोदाम में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में चार लोगों की जान ले ली, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। आग की भयावहता इतनी अधिक थी कि कई लोग जलने के बाद सड़क पर तड़पते रहे और मदद का इंतजार करते रहे। इस हादसे ने एक बार फिर अवैध गोदामों, प्रशासनिक लापरवाही और मानव जीवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ ही मिनटों में मची तबाही, चार परिवारों के घरों में पसरा मातम
खोह नागोरियान के आयशा नगर तलाई क्षेत्र स्थित पटाखों के गोदाम में मंगलवार सुबह करीब 11 बजे अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।
हादसे में अब्दुल वाहिद समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन मृतकों की पहचान अभी नहीं हो सकी है। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल बताया जा रहा है। आग की लपटों और धमाकों के बीच कई लोग बाहर निकलने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ को बचने का मौका नहीं मिल सका।
हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। परिजनों और स्थानीय लोगों की आंखों के सामने अपनों को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
सड़क पर तड़पते रहे घायल, कई लोग सिर्फ देखते रहे
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि आग से झुलसे कई लोग बाहर निकलने के बाद सड़क पर तड़पते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि लोग मदद करने से भी डर रहे थे।
स्थानीय निवासी हाशिम अंसारी ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि सूचना मिलने के बाद वह मौके पर पहुंचे और टैंकर के पाइप की मदद से अंदर जाने की कोशिश की।
हाशिम ने बताया कि उन्होंने तीन से चार लोगों को बाहर निकाला और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया, लेकिन आग तेजी से फैलने के कारण बाकी लोगों को नहीं बचाया जा सका। लोगों को बचाने के दौरान उनके कपड़े जल गए और उनका पैर भी झुलस गया।
चार मजदूर गंभीर रूप से झुलसे, अस्पताल में जिंदगी की जंग जारी
अग्निकांड में चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घायलों में आजीम खान (18), नासिर खान (20), समीर खान (20) और बिलाल (22) शामिल हैं। सभी खोह नागोरियान के रहीम नगर क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
एसएमएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डॉ. आर.के. जैन के अनुसार समीर और नासिर करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं। बिलाल 75 प्रतिशत और आदिब 65 प्रतिशत तक जल गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनका उपचार कर रही है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।
रिहायशी इलाके में अवैध गोदाम पर उठे सवाल, जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
हादसे के बाद यह खुलासा हुआ कि जिस स्थान पर आग लगी, वह रिहायशी इलाके में संचालित एक अवैध पटाखा गोदाम था।
जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह पटाखों का स्टोरेज गोदाम प्रतीत होता है, जबकि इसकी फैक्ट्री कहीं और स्थित है। उन्होंने कहा कि विस्तृत जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि रिहायशी क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गोदाम के मालिक, मकान मालिक और यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक या पुलिस लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
विधायक ने उठाए तीखे सवाल, प्रशासनिक विफलता पर घिरा तंत्र
घटना के बाद स्थानीय विधायक अमीन कागजी ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि रिहायशी इलाके में बारूद और पटाखों का गोदाम संचालित हो रहा था, तो क्या इसकी जानकारी पुलिस और प्रशासन को नहीं थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
विधायक ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले चाहे किसी भी राज्य के हों, उनका जीवन उतना ही मूल्यवान है। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मानव जीवन की कीमत और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
जयपुर का यह दर्दनाक हादसा केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है। यदि समय रहते अवैध गोदामों पर कार्रवाई होती और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता, तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
अब पीड़ित परिवारों की निगाहें जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस हादसे से सबक लेकर भविष्य में ऐसे अवैध और खतरनाक गोदामों पर प्रभावी कार्रवाई होगी या फिर कोई और परिवार इसी तरह अपने प्रियजनों को खोने के लिए मजबूर होगा।
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