शिल्पग्राम में 15 करोड़ की लागत से नया सांस्कृतिक हब, हटेंगी पारंपरिक झोपड़ियां..

शिल्पग्राम में 15 करोड़ की लागत से नया सांस्कृतिक हब, हटेंगी पारंपरिक झोपड़ियां..

जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में होगा बड़े स्तर पर पुनर्विकास

24 हैंडीक्राफ्ट शॉप्स, फूड कोर्ट और आर्टिस्ट रेजिडेंसी का होगा निर्माण

पारंपरिक झोपड़ियों की जगह आधुनिक लेकिन राजस्थानी शैली का ढांचा तैयार होगा

कलाकारों और हस्तशिल्पकारों को मिलेगा स्थायी मंच और लाइव प्रदर्शन की सुविधा

शिल्पग्राम को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर, dusrikhabar.com। जयपुर स्थित जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के पास बना प्रसिद्ध शिल्पग्राम अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। राजस्थान सरकार करीब 15 करोड़ रुपए खर्च कर इस सांस्कृतिक परिसर का पुनर्विकास करने जा रही है। इस परियोजना के तहत वर्षों पुरानी पारंपरिक झोपड़ियों को हटाकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त हैंडीक्राफ्ट शॉप्स, फूड कोर्ट, आर्टिस्ट रेजिडेंसी और हाट बाजार विकसित किए जाएंगे।

हालांकि इस बदलाव को लेकर कला प्रेमियों और सांस्कृतिक जानकारों के बीच चर्चा भी तेज हो गई है, क्योंकि शिल्पग्राम अपनी मूल ग्रामीण और पारंपरिक पहचान के लिए जाना जाता रहा है।

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शिल्पग्राम के मूल स्वरूप में बदलाव की तैयारी

जयपुर का शिल्पग्राम लंबे समय से राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति, लोककला और हस्तशिल्प की जीवंत पहचान रहा है। यहां बनी मिट्टी, लकड़ी और खपरैल की पारंपरिक झोपड़ियां राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत करती रही हैं। अब सरकार इसे आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी में है।

करीब 9 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाले इस नए प्रोजेक्ट के तहत 24 आधुनिक हैंडीक्राफ्ट दुकानें, कलाकारों के रहने के लिए आर्टिस्ट रेजिडेंसी, पारंपरिक शैली का हाट बाजार और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का दावा है कि इससे शिल्पग्राम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

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राजस्थानी आंगन शैली में तैयार होगा नया शिल्पग्राम

नए प्रोजेक्ट के तहत पूरे परिसर को पारंपरिक राजस्थानी बाजार और हवेलियों की थीम पर डिजाइन किया जाएगा। यहां बनने वाली दुकानों और कार्यशालाओं को गलियारों के किनारे विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटक खरीदारी के साथ-साथ कलाकारों को काम करते हुए भी देख सकें।

इस पूरे परिसर में छोटे-छोटे खुले आंगन बनाए जाएंगे, जहां प्राकृतिक रोशनी और हवा का बेहतर प्रवाह रहेगा। इन्हें सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संवाद और कला प्रदर्शन के लिए उपयोग किया जाएगा।

नई संरचना में पत्थर के खंभे, झरोखे, नक्काशीदार डिजाइन, छायादार रास्ते और राजस्थानी स्थापत्य कला की झलक देखने को मिलेगी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक सुविधाओं को पारंपरिक सौंदर्य के साथ जोड़ना बताया जा रहा है।

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जेकेके शिल्पग्राम जयपुर

वर्तमान में कुछ इस तरह का दिखता है जयपुर जेकेके स्थित शिल्पग्राम

वर्षों से ग्रामीण संस्कृति की पहचान रहा है शिल्पग्राम

शिल्पग्राम केवल एक पर्यटन स्थल नहीं बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है। यहां बनी झोपड़ियां प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जीवनशैली और स्थापत्य कला को दर्शाती हैं।

इनमें ब्रज क्षेत्र (भरतपुर), हाड़ौती (कोटा), शेखावाटी (सीकर), मरुस्थलीय क्षेत्र (बाड़मेर-बीकानेर) और डूंगरपुर के आदिवासी इलाकों की पारंपरिक झलक देखने को मिलती रही है।

यही कारण है कि यहां आयोजित होने वाले लोकरंग उत्सव, सरस मेला, कालबेलिया नृत्य, कठपुतली शो और लोकसंगीत कार्यक्रम वर्षों से पर्यटकों और कला प्रेमियों को आकर्षित करते रहे हैं। कई कला विशेषज्ञों का मानना है कि शिल्पग्राम की यही मूल पहचान इसे खास बनाती है।

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आधुनिक सुविधाओं के साथ कलाकारों को मिलेगा बड़ा मंच

सरकार के इस नए प्रोजेक्ट के तहत देशभर के कलाकारों और शिल्पकारों को एक स्थायी मंच उपलब्ध कराया जाएगा। यहां नियमित रूप से लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन, वर्कशॉप, सांस्कृतिक आयोजन और कला प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

नई हैंडीक्राफ्ट दुकानों में कलाकार अपने उत्पादों को बेहतर तरीके से प्रदर्शित और बेच सकेंगे। इससे स्थानीय हस्तशिल्प और लोककला को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे जयपुर का सांस्कृतिक पर्यटन और अधिक मजबूत होगा और पर्यटक यहां केवल खरीदारी के लिए नहीं बल्कि कला को करीब से समझने और अनुभव करने के लिए भी आएंगे।

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उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बताई सरकार की मंशा

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिल्पग्राम को केवल एक पर्यटन स्थल बनाना नहीं है, बल्कि इसे भारतीय संस्कृति और शिल्प परंपरा की जीवंत पहचान के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि नया शिल्पग्राम देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को राजस्थान और भारत की समृद्ध कला विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगा। सरकार चाहती है कि यहां आने वाले लोग केवल हस्तशिल्प खरीदें ही नहीं बल्कि भारतीय कला और संस्कृति को करीब से महसूस भी करें।

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