
मंगलमप्लस मेडिसिटी में कार्डियोलॉजी में अब 360-डिग्री कार्डियोलॉजी केयर
जयपुर में दिल के इलाज में बड़ी छलांग
मंगलमप्लस मेडिसिटी में कार्डियोलॉजी विभाग का विस्तार
शिशु हृदय रोग से लेकर एडवांस कार्डियक सर्जरी तक 360-डिग्री सुविधा
उत्तर भारत की अत्याधुनिक कैथ लैब के साथ नई तकनीकों की शुरुआत
राजस्थान में पहली बार लीडलेस पेसमेकर (AAI) का सफल प्रत्यारोपण
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर में हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए Manglamplus Medicity Hospital ने अपने हृदय रोग विभाग का विस्तार किया है। इस विस्तार के साथ अस्पताल अब 360-डिग्री कार्डियोलॉजी केयर सिस्टम के जरिए मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज प्रदान कर रहा है। नई सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ यह सेंटर अब राजस्थान में हृदय रोग उपचार के नए मानक स्थापित कर रहा है।
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मंगलमप्लस मेडिसिटी हॉस्पिटल के कार्डियक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम, मध्य में हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ दीपेंद्र भटनागर।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से मजबूत हुआ विभाग
विभाग के विस्तार के तहत डॉ. अभिमन्यु उप्पल (बाल चिकित्सा कार्डियोलॉजिस्ट) और डॉ. विनोद गुप्ता (कार्डियक सर्जन) ने अपनी सेवाएं शुरू की हैं। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. दीपेंद्र भटनागर के अनुसार, यह सेंटर अब राजस्थान के अग्रणी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया पिछले दो माह में मंगलमप्लस मेडिसिटी अस्पताल 70से अधिक हार्ट पेंशेंट की सर्जरी कर चुका है।
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अत्याधुनिक तकनीकों से होगा इलाज
अस्पताल में उपलब्ध कैथ लैब में लेजर (ELCA), रोटा प्रो, OCT, IVUS, FFR और IVL जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जटिल हृदय रोग उपचार किया जा रहा है। यहां नवजात और बच्चों के हृदय रोग का इलाज एडवांस इंटरवेंशनल तकनीकों से सुरक्षित रूप से किया जा रहा है, जिसमें NICU और पीडियाट्रिक कार्डियक सपोर्ट सिस्टम की सुविधा भी शामिल है।
एडल्ट और पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी की पूरी सुविधा
डॉ. विनोद गुप्ता के अनुसार अस्पताल में अब एडल्ट और पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी की संपूर्ण सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि यहां 24×7 क्रिटिकल केयर के साथ TAVI, ICD और CRTD जैसी उन्नत सेवाएं भी दी जा रही हैं।
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डॉ. अभिमन्यु उप्पल
हार्ट के छेद अपनेआप नहीं भरते, भ्रांतियां दूर करने की जरूरत: डॉ उप्पल
डॉ अभिमन्यु उप्पल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि हार्ट से जुड़ी समस्याएं महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक हैं। वहीं बच्चों की बात करें तो हर 100 बच्चों में से एक बच्चा जन्म के साथ ही हार्ट डिजिज से पीड़ित होता है।
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उन्होंने खास तौर पर इस बात को साझा किया कि हार्ट में छेद को लेकर कई भ्रांतियां हैं इसलिए यह बात आम आदमी तक पहुंचनी चाहिए कि हार्ट में हर छेद स्वत: ही नहीं भरता कुछ अपने आप सही हो जाते हैं और कुछ का उपचार जरूरी होता है। लेकिन उसकी जानकारी चेकअप के बाद ही पता लगती है।
अगर आपने खुद ही निर्णय ले लिया तो आपके बच्चे का विकास रुक सकता है। इसलिए जांच करवाकर एक की जगह भले ही दो डॉक्टरों से सलाह लें लेकिन खुद निर्णय नहीं करें। ये आपके बच्चे के लिए जानलेवा भी हो सकता है।
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डॉ नरेंद्र कुमार बैरवा
पेसमेकर और नई उपलब्धि
हृदय की धड़कन से जुड़ी समस्याओं के लिए अत्याधुनिक पेसमेकर इंप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नरेंद्र कुमार बैरवा ने बताया कि हाल ही में अस्पताल में राजस्थान का पहला लीडलेस पेसमेकर (AAI) सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया, जिसमें डॉ. जीतेन्द्र मक्कड़ भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि हर महीने करीब 4000 पेशेंट ऐसे आते हैं जो हार्ट डिजिज से पीड़ित होते हैं इसमें से लगभग 100 ऐसे होते हैं जिन्हें हार्ट सर्जरी या एंजियोग्राफी से उपचार की जरूरत होती है।
डॉ. प्रतीक शर्मा (कार्डियक एनेस्थेटिस्ट) के अनुसार, पीडियाट्रिक और एडल्ट कार्डियक सर्जरी के लिए यहां एडवांस्ड एनेस्थीसिया सेवाएं उपलब्ध हैं, जिससे जटिल प्रक्रियाएं भी सुरक्षित तरीके से की जा रही हैं।
क्या है लीडलेस पेसमेकर
एक छोटा, तार-रहित उपकरण है जो पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में 90% छोटा (1-1.5 इंच) होता है और सीधे हृदय (दाहिने अलिंद/Atrium) में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह बिना किसी चीरे या सर्जिकल पॉकेट के कैथेटर के माध्यम से लगाया जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है और तेजी से रिकवरी होती है।
लीडलेस पेसमेकर (AAI) की प्रमुख विशेषताएं:
- बिना लीड (तार) के: इसमें तारों की जरूरत नहीं होती, इसलिए तार से जुड़ी जटिलताएं (जैसे फ्रैक्चर या संक्रमण) नहीं होती हैं।
- प्रत्यारोपण प्रक्रिया: इसे जांघ की नस (Femoral Vein) के माध्यम से कैथेटर द्वारा सीधे हृदय में स्थापित किया जाता है।
- AAI मोड (एट्रियल पेसिंग): यह मुख्य रूप से ‘सिक साइनस सिंड्रोम’ (Sick Sinus Syndrome) के रोगियों के लिए है, जहां अलिंद (Atrium) को पेस करने की आवश्यकता होती है।
- कम जोखिम: यह छाती पर कोई निशान या उभार नहीं छोड़ता है।
- स्थायित्व: इसकी बैटरी लंबी चलती है और यह पारंपरिक पेसमेकर की तुलना में अधिक समय तक काम कर सकता है।
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हर मरीज को समय पर विश्वस्तरीय इलाज
मंगलम ग्रुप के चेयरमैन एन.के. गुप्ता के अनुसार अस्पताल का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को समय पर और विश्वस्तरीय हृदय उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि हार्ट अटैक, क्रोनिक कोरोनरी आर्टरी डिजीज और सडन कार्डियक डेथ जैसी गंभीर समस्याओं में कमी लाई जा सके।
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