
पूर्व राजपरिवार सम्पत्ति विवाद: HC में पद्मजा कुमारी की याचिका की खारिज
उदयपुर राजपरिवार संपत्ति विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट से पद्मजा को झटका
हाईकोर्ट में लक्ष्यराज सिंह की ओर से पेश हुई मजबूत दलील
दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ याचिका खारिज की
लक्ष्यराज बोले- सच्चाई की जीत, परिवार ने झेली मुश्किलें
सिटी पैलेस के बाहर आतिशबाजी, शहर में जश्न का माहौल
विजय श्रीवास्तव,
उदयपुर/दिल्ली, dusrikhabar.com। उदयपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहे संपत्ति विवाद में बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को राहत मिली है। इस फैसले के बाद उदयपुर में जश्न का माहौल देखने को मिला।
उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के बीच चल रहे उदयपुर राजपरिवार संपत्ति विवाद मामले में मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। यह विवाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनकी बहन पद्मजा कुमारी परमार के बीच चल रहा है।
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पद्मजा कुमारी ने अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति को लेकर ‘लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन’ की मांग की थी। उनका दावा था कि उनके पिता की मृत्यु बिना वसीयत के हुई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया।
जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि जब तक भाई द्वारा पेश किए गए वसीयतनामे से संबंधित मामला कोर्ट में लंबित है, तब तक ‘बिना वसीयत’ के आधार पर कोई कानूनी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने पद्मजा कुमारी को संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़े अपने तर्क रखने की अनुमति दी है। मामले की अगली सुनवाई अब 4 मई को होगी।
फैसले के बाद जश्न का माहौल
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उदयपुर के सिटी पैलेस स्थित जगदीश चौक गेट के बाहर शहरवासियों ने आतिशबाजी कर खुशी जताई। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ भी अपनी पत्नी निवृत्ति कुमारी और बच्चों के साथ पैदल जगदीश मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। रास्ते में व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। लक्ष्यराज सिंह ने कहा, “यह सच्चाई की जीत है। हमारा परिवार लंबे समय से परेशानियों से गुजर रहा था। आज का फैसला हमारे लिए बहुत खुशी का क्षण है।”
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लक्ष्यराज का बयान: परिवार ने झेला संघर्ष
दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि हाईकोर्ट ने सच्चाई को सामने लाया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनके पिता जहां भी होंगे, उन्हें इस फैसले से सुकून मिला होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता के बारे में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया, उससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा था, लेकिन अब सच्चाई सामने आने से संतोष है।
अरविंद सिंह मेवाड़ की मृत्यु के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा संपत्ति विवाद दिवंगत अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति से जुड़ा है, जिनका निधन 16 मार्च 2025 को उदयपुर में हुआ था। पद्मजा कुमारी ने कोर्ट में दावा किया था कि उनके पिता की मृत्यु बिना वैध वसीयत के हुई। वहीं, दोनों पक्षों के बीच सिटी पैलेस और HRH होटल्स ग्रुप समेत अन्य संपत्तियों के अधिकार को लेकर विवाद जारी है।
पुराना है मेवाड़ राजपरिवार का संपत्ति विवाद
उदयपुर राजपरिवार संपत्ति विवाद कोई नया मामला नहीं है। यह विवाद दशकों पुराना है, जिसकी जड़ें भगवत सिंह मेवाड़ के समय से जुड़ी हैं।
भगवत सिंह मेवाड़ के तीन बच्चे—महेंद्र सिंह, अरविंद सिंह और योगेश्वरी कुमारी थे। 1983 में संपत्ति को बेचने और लीज पर देने के उनके फैसले के बाद परिवार में मतभेद शुरू हो गए थे। महेंद्र सिंह ने इस फैसले के खिलाफ कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद नाराज होकर भगवत सिंह ने संपत्ति की जिम्मेदारी छोटे बेटे अरविंद सिंह को सौंप दी।
1984 में भगवत सिंह के निधन के बाद यह विवाद और गहरा गया। करीब 37 साल की कानूनी लड़ाई के बाद 2020 में उदयपुर जिला अदालत ने संपत्ति को चार हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। कोर्ट के फैसले तक अधिकांश संपत्ति अरविंद सिंह मेवाड़ के पास रही, जबकि अन्य सदस्यों को सीमित हिस्सा मिला। साथ ही, शंभू निवास पैलेस, बड़ी पाल और घासघर जैसी संपत्तियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर रोक भी लगाई गई थी।
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