पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना से दौसा को राहत, विधानसभा में..

पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना से दौसा को राहत, विधानसभा में..

पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना से दौसा को राहत, विधानसभा में बोले सुरेश सिंह रावत

पीकेसी-ईआरसीपी एकीकृत परियोजना में दौसा जिला भी शामिल

डीपीआर केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में परीक्षणाधीन

रेहडिया बांध को जोड़ने पर स्वीकृति के बाद ही होगा फैसला

जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान के जल संकट से जूझ रहे इलाकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी एकीकृत) के तहत अब दौसा जिला भी लाभान्वित जिलों की सूची में शामिल है। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने यह महत्वपूर्ण जानकारी दी और स्पष्ट किया कि परियोजना की डीपीआर फिलहाल केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में परीक्षणाधीन है।

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विधानसभा में सदस्य भागचन्द टांकड़ा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने कहा कि संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक (पीकेसी-ईआरसीपी एकीकृत) परियोजना के अंतर्गत लाभान्वित होने वाले जिलों में दौसा को भी सम्मिलित किया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में परियोजना की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) केंद्रीय जल आयोग, नई दिल्ली में परीक्षण की प्रक्रिया से गुजर रही है। आयोग से सक्षम स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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मंत्री रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि बांदीकुई क्षेत्र के रेहडिया बांध को परियोजना से जोड़ने के संबंध में अंतिम निर्णय डीपीआर की स्वीकृति और जल उपलब्धता के आकलन के आधार पर लिया जाएगा। जब तक केंद्रीय स्तर पर स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं की जा सकती।

प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने यह महत्वपूर्ण तथ्य भी साझा किया कि बांदीकुई का रेहडिया बांध पिछले 20 वर्षों में मात्र तीन बार ही अपनी पूर्ण भराव क्षमता यानी 187 एमसीएफ तक भर पाया है। इससे क्षेत्र में जल उपलब्धता की गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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इससे पहले विधायक भागचन्द टांकड़ा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में भी मंत्री रावत ने दोहराया कि संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी एकीकृत परियोजना की डीपीआर केंद्रीय जल आयोग में परीक्षणाधीन है। उन्होंने कहा कि परियोजना में शामिल किए जाने वाले बांधों का अंतिम विवरण सक्षम स्वीकृति और जल उपलब्धता के वैज्ञानिक आकलन के बाद ही तय किया जाएगा। उसी आधार पर आगे की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी।

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राजस्थान के पूर्वी और जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि डीपीआर को स्वीकृति मिलती है और बांधों का एकीकरण होता है, तो दौसा जिले सहित आसपास के क्षेत्रों को दीर्घकालिक जल समाधान मिल सकता है।

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