
आरटीडीसी को स्थायी नेतृत्व की दरकार..! अतिरिक्त प्रभार से चल रहा विभाग
आरटीडीसी को स्थायी एमडी की दरकार…! दो अन्य महत्वपूर्ण पद भी रिक्त
कार्यकारी निदेशक और कार्यकारी निदेशक वित्त दोनों बड़े पदों को भी चाहिए अफसर
स्थायी अधिकारियों के बिना विभागीय फैसले ठप
खाली पदों से लड़खड़ाता राजस्थान टूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन
आरटीडीसी में अधिकतर कार्यों की स्वीकृतियां और निर्णय हो रहे लेट
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान पर्यटन की रीढ़ माने जाने वाले राजस्थान ट्यूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RTDC) में इन दिनों प्रशासनिक अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। प्रबंध निदेशक (MD) का पद लंबे समय से अतिरिक्त प्रभार के भरोसे है, वहीं कार्यकारी निदेशक और कार्यकारी निदेशक (वित्त) जैसे दो अहम पद भी रिक्त हैं। नतीजा यह है कि विभाग के बड़े फैसले, बजट स्वीकृतियां और रणनीतिक योजनाएं समय पर आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
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रुकमणि रियाड़, पर्यटन आयुक्त
अतिरिक्त प्रभार पर टिका RTDC का दारोमदार, जर्जर होटल्स बंद करने का लिया अहम निर्णय
वर्तमान में आरटीडीसी एमडी का अतिरिक्त प्रभार पर्यटन विभाग आयुक्त रुकमणि रियाड़ के पास है। हालांकि पर्यटन विभाग में पहले से मौजूद कार्यभार अधिक होने के कारण वे RTDC की नियमित बैठकों और विभागीय निर्णयों के लिए समय नहीं निकाल पा रही हैं।
स्थिति यह है कि पिछले छह महीनों से RTDC की एक ही बजट मीटिंग हो सकी, जिसमें एमडी आरटीडीसी ने हाईकोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार जर्जर इमारतों को बंद करने के तहत आरटीडीसी की जर्जर होटल्स को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। हालांकि विषय विशेषज्ञों के अनुसार हर दो या तीन महीने में एमडी द्वारा विभाग आंतरिक बैठक ली जानी चाहिए ताकि विभाग की प्रगति पर चर्चा हो सके और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकें।
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आरटीडीसी तत्कालीन एमडी सुषमा अरोड़ा
सितंबर 2025 से खाली है स्थायी एमडी का पद
आपको बता दें कि सितंबर 2025 में आरटीडीसी की तत्कालीन एमडी सुषमा अरोड़ा के सेवानिवृत्त होने के बाद से ही यह पद स्थायी रूप से भरा नहीं है। तब से विभाग के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और व्यावसायिक फैसले लंबित पड़े हैं, जिससे न केवल योजनाएं रुकी हैं बल्कि विभाग को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
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दो और बड़े पद खाली, कामकाज पर असर
विभाग के दो अन्य महत्वपूर्ण पदों के रिक्त होने से विभाग की स्थिति और गंभीर हो गई है। राजस्थान ट्यूरिज्म डपलेपमेंट कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक पद पर राजेश सिंह और कार्यकारी निदेशक (वित्त) पद पर ब्रह्मप्रकाश शर्मा कार्यरत थे लेकिन फिलहाल विभाग के इन दोनों पदों पर भी स्थायी अधिकारी नहीं है। ब्रह्मप्रकाश शर्मा बजट तैयारियों में और राजेश सिंह अपने मूल विभाग में वापस लौट गए हैं जिसके चलते विभाग में निर्णय क्षमता कम हो गई है। सूत्रों के मुताबिक इन पदों के खाली होने से फाइल मूवमेंट, वित्तीय स्वीकृतियां और प्रोजेक्ट क्लियरेंस काफी प्रभावित हो रहे हैं।
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राजस्व का हो रहा नुकसान, बढ़ रही प्रशासनिक परेशानी
जानकार सूत्रों की मानें तो लंबित कार्यों और समय पर निर्णय न होने के कारण RTDC को रेवेन्यू लॉस झेलना पड़ रहा है। साथ ही विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों को भी रोजमर्रा के कामकाज और निर्णयों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले सात साल में RTDC में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक
H. गुईटे – मई 2018 से मार्च 2019 तक
N. गोहेन – जनवरी 2021 से अक्टूबर 2021 तक
विजयपाल सिंह– जुलाई 2022 से फरवरी 2024 तक
अनुपमा जोरवाल – फरवरी 2024 से सितम्बर 2024 तक
सुषमा अरोड़ा– सितम्बर 2024 से मई 2025
सेना, बिना सरदार जैसी स्थिति
विभागीय हालात की तुलना करें तो स्थिति कुछ वैसी ही हो गई है जैसे सेना, बिना सरदार के—जहां संसाधन तो हैं, लेकिन नेतृत्व का पूरा फोकस नहीं होने के अभाव में उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा।
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अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा RTDC अब स्थायी एमडी और वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति का इंतजार कर रहा है, ताकि विभाग फिर से गति पकड़ सके।
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