
JLF 2026 में ‘When Gods Don’t Matter’ का विमोचन, जगदीप सिंह–स्वाति वशिष्ठ के बीच गहन संवाद
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में लेखक जगदीप सिंह की नई कविता पुस्तक का लोकार्पण
आस्था, पहचान और मानवीय संवेदनाओं पर केंद्रित रहा साहित्यिक संवाद
कविता पाठ ने श्रोताओं को जोड़ा, भावनात्मक गहराई से रूबरू हुआ मंच
जयपुर, dusrikhabar.com। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के एएएफ बागान वेन्यू पर साहित्य और विचारों का एक प्रभावशाली सत्र देखने को मिला, जहां लेखक और कवि जगदीप सिंह तथा वरिष्ठ पत्रकार व लेखिका स्वाति वशिष्ठ के बीच गहन संवाद हुआ। इस अवसर पर जगदीप सिंह के नए कविता संग्रह ‘When Gods Don’t Matter’ का आधिकारिक विमोचन भी किया गया, जिसने समकालीन कविता और मानवीय अनुभवों पर नई बहस को जन्म दिया।
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के तहत आयोजित इस विशेष साहित्यिक सत्र में कविता, दर्शन और आज की सामाजिक सच्चाइयों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ। सत्र का केंद्र बिंदु कवि एवं पीआर प्रोफेशनल जगदीप सिंह की नई पुस्तक ‘When Gods Don’t Matter’ रही, जिसका विमोचन लेखक और कल्चरिस्ट संदीप भूतोड़िया ने नमिता गोखले (फेस्टिवल को-डायरेक्टर) और संजॉय के. रॉय (मैनेजिंग डायरेक्टर, टीमवर्क आर्ट्स) की उपस्थिति में किया।
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संवाद के दौरान जगदीप सिंह ने अपनी कविताओं के दार्शनिक और भावनात्मक पक्ष पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि ‘When Gods Don’t Matter’ उनके निजी अनुभवों और आत्मचिंतन से उपजी रचनाओं का संग्रह है, जहां कविता उनके लिए मौन, आस्था और व्यक्तिगत सत्य से संवाद करने का माध्यम बनती है। उनकी कविताओं में विश्वास, पहचान और तेजी से बदलती दुनिया में मनुष्य की स्थिति जैसे विषय प्रमुख रूप से उभरते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार स्वाति वशिष्ठ ने समकालीन समय में कविता की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि आज की कविता ईश्वर-केंद्रित विचारों से आगे बढ़कर व्यक्तिगत अनुभवों और सामाजिक यथार्थ को अधिक मुखरता से सामने ला रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जगदीप सिंह की कविताएं उन पाठकों से गहराई से जुड़ती हैं, जो अनिश्चितता, मूल्यों के संकट और पारंपरिक ढांचों से हटकर जीवन के अर्थ की तलाश में हैं।
संवाद के दौरान जगदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके लिए कविता जवाब देने का माध्यम नहीं, बल्कि सच्चे सवाल पूछने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि ‘When Gods Don’t Matter’ उन क्षणों को अभिव्यक्त करने का प्रयास है, जब आस्था से अधिक मानवीय संवेदनशीलता और अंतरात्मा निर्णायक हो जाती है।
सत्र को और अधिक जीवंत बनाते हुए, जगदीप सिंह ने अपनी तीन से चार कविताओं का पाठ भी किया। कविता पाठ के दौरान श्रोता उनकी रचनाओं की भावनात्मक गहराई और वैचारिक तीव्रता से जुड़ते नजर आए, जिससे यह सत्र JLF के यादगार आयोजनों में शामिल हो गया।
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