अनहद संगीत संध्या: जयपुर की ठंडी शाम में शास्त्रीय सुरों की गर्माहट…

अनहद संगीत संध्या: जयपुर की ठंडी शाम में शास्त्रीय सुरों की गर्माहट…

खुले आकाश में शास्त्रीय सुरों की गर्माहट: अनहद संगीत संध्या ने सर्द शाम को बनाया यादगार

जवाहर कला केंद्र में सजी अनहद की पांचवीं प्रस्तुति, सुरों में पिघली सर्दी

डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे के भावपूर्ण गायन से श्रोताओं पर छाया राग-रस

राजस्थान पर्यटन विभाग की पहल से आमजन तक पहुंच रहा शास्त्रीय संगीत

नवीन सक्सेना,

जयपुर,dusrikhabar.com। शनिवार की सर्द शाम, खुले आकाश के नीचे और सुरों की तपिश—जयपुर के जवाहर कला केंद्र का मध्यवर्ती प्रांगण शास्त्रीय संगीत प्रेमियों से सराबोर नजर आया। ऊनी शॉल, जैकेट और टोपी में लिपटे दर्शक ठंडी हवाओं के बीच कुर्सियों पर जमे रहे, लेकिन जैसे ही अनहद संगीत श्रृंखला की पाँचवीं प्रस्तुति शुरू हुई, सर्दी मानो पीछे छूट गई और सुरों की गर्माहट ने माहौल को अपने आगोश में ले लिया।

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अनहद संगीत संध्या में अश्विनी भिड़े की प्रस्तुति JKK

खुले आकाश में सुरों का जादू

राजस्थान पर्यटन विभाग और स्पिक मैके के संयुक्त आयोजन में हुई इस संध्या में मुंबई की प्रख्यात शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे ने अपने शांत, संतुलित और भावपूर्ण गायन से पूरे प्रांगण को एक सूत्र में बांध दिया। दर्शकों में युवा संगीत विद्यार्थी, वरिष्ठ शास्त्रीय रसिक और वे लोग भी शामिल थे, जो पहली बार शास्त्रीय संगीत को इतनी निकटता से सुन रहे थे। हर वर्ग के श्रोता एक ही लय में बंधे दिखाई दिए।

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रागों की प्रस्तुति में भाव और लय का संतुलन

कार्यक्रम की शुरुआत राग श्री से हुई। जैसे-जैसे विलंबित तीन ताल की बंदिश “कहां गुरु मैं ढूंढन जाऊं” आगे बढ़ी, पूरा प्रांगण शांति में डूब गया। मोबाइल फोन बंद हो चुके थे, बातचीत थम गई थी और हर नजर मंच पर टिकी थी। इसके बाद द्रुत तीन ताल की बंदिश “ऐ री है तो आस न गई” पर कई श्रोताओं के चेहरे खिल उठे और सिर लय में हिलने लगे।

प्रख्यात शास्त्रीय गायिका डॉ. अश्विनी भिड़े-देशपांडे

इसके पश्चात राग दुर्गा में प्रस्तुत बंदिश “माता कालिका” ने वातावरण को गहरे भक्ति भाव से भर दिया। कुछ पलों के लिए प्रांगण किसी मंदिर-सा प्रतीत हुआ। द्रुत तराना के दौरान तालियों की गूंज ने यह स्पष्ट कर दिया कि श्रोता पूरी तरह प्रस्तुति से जुड़ चुके हैं।

संगत और सुरों का मजबूत आधार

हारमोनियम पर ध्यानेश्वर सोनावणे और तबले पर प्रणव गुरव की सधी हुई संगत ने गायन को सशक्त आधार दिया। तबले की थाप और हारमोनियम के मधुर सुर खुले प्रांगण में दूर तक फैलते रहे। सर्द मौसम के बावजूद दर्शकों की संख्या अंत तक बनी रही। ठंडी हवा, हल्की रोशनी और शास्त्रीय सुर—इन सबने मिलकर संध्या को खास और अविस्मरणीय बना दिया।

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शास्त्रीय संगीत को आमजन से जोड़ने की पहल

उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के मार्गदर्शन में राजस्थान पर्यटन विभाग प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने के लिए ऐसे खुले और जनसुलभ आयोजनों को निरंतर बढ़ावा दे रहा है। अनहद श्रृंखला इसी सोच का जीवंत उदाहरण है, जो शास्त्रीय संगीत को आम दर्शकों तक पहुंचाने का कार्य कर रही है।

अनहद संगीत संध्या में अश्विनी भिड़े की प्रस्तुति JKK 1

जयपुर-अतरोली घराने की इस वरिष्ठ गायिका के गायन में राग की स्पष्टता, भाव की सादगी और लय की शुद्धता निरंतर महसूस होती रही। हर दूसरे शनिवार को आयोजित होने वाली अनहद संगीत श्रृंखला की यह संध्या सर्द मौसम में सुरों की गर्माहट बनकर दर्शकों की यादों में दर्ज हो गई।

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इस अवसर पर पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. पुनीता सिंह, सहायक निदेशक हनुमान सहाय कुमावत, हिमांशु मेहरा, लेखाधिकारी ताराचंद मंडीवाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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