
गीतांजली हॉस्पिटल जयपुर ने किया व्यस्क वैक्सीनेशन सेंटर का शुभारंभ…
स्यस्क टीकाकरण से गंभीर बीमारियों पर लगेगा अंकुश
राजस्थान मेडिकल काउंसिल अध्यक्ष डॉ. जगदीश मोदी बोले—एडल्ट वैक्सीनेशन आज की जरूरत
स्वस्थ वृद्धावस्था और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम
नवीन सक्सेना,
जयपुर, dusrikhabar.com। जयपुर में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देते हुए गीतांजली हॉस्पिटल, जयपुर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार, 10 जनवरी 2026 को अस्पताल में एडल्ट वैक्सीनेशन सेंटर का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह केंद्र वयस्कों में संक्रामक रोगों की रोकथाम, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है, जो बदलती जीवनशैली और बढ़ते संक्रमणों के दौर में बेहद अहम माना जा रहा है।
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एडल्ट वैक्सीनेशन पर विशेषज्ञों का जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष एवं एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुर के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. जगदीश मोदी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वयस्क टीकाकरण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। बदलती जीवनशैली, शहरीकरण और संक्रमणों की बढ़ती चुनौती के बीच एडल्ट वैक्सीनेशन गंभीर बीमारियों से बचाव में निर्णायक भूमिका निभाता है और समाज को स्वस्थ रखने में सहायक है।
रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवा की प्रतिबद्धता
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अशोक गुप्ता, डीन एवं प्रिंसिपल, गीतांजली इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि गीतांजली हॉस्पिटल का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि रोकथाम के जरिए समाज को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ बनाना है। एडल्ट वैक्सीनेशन सेंटर इसी सोच का सशक्त उदाहरण है।
इस अवसर पर अनुराग जैन, ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट, गीतांजली ग्रुप ने संस्था की निवारक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सामुदायिक स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला।
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वयस्क टीकाकरण की वैज्ञानिक भूमिका पर व्याख्यान
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राहुल अहलूवालिया, कंसल्टेंट–श्वसन रोग विशेषज्ञ ने वयस्क टीकाकरण की भूमिका पर एक ज्ञानवर्धक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने श्वसन संक्रमणों की रोकथाम, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इसके पश्चात अतिथियों द्वारा लॉन्च पोस्टर का अनावरण किया गया, जो एडल्ट वैक्सीनेशन सेंटर की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक बना।

भारत में क्यों जरूरी है वयस्क टीकाकरण
भारत में वयस्क टीकाकरण की आवश्यकता इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इन्फ्लुएंजा, न्यूमोकोकल संक्रमण, हेपेटाइटिस-बी, टेटनस, डिप्थीरिया, कोविड-19 और हर्पीज़ ज़ोस्टर जैसे कई टीका-निवारणीय रोग आज भी गंभीर बीमारी, मृत्यु और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ का कारण बनते हैं।
समय के साथ प्रतिरक्षा शक्ति कम होती जाती है और बढ़ती उम्र के साथ रोगों की गंभीरता भी बढ़ती है, जिससे वयस्कों और बुज़ुर्गों में संक्रमण का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों के रोग, किडनी रोग और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों से ग्रस्त वयस्कों में संक्रमण से जटिलताओं और मृत्यु का खतरा अधिक होता है।
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धन्यवाद ज्ञापन और भविष्य की दिशा
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। गीतांजली हॉस्पिटल, जयपुर का यह एडल्ट वैक्सीनेशन सेंटर वयस्कों को समय पर टीकाकरण के माध्यम से गंभीर बीमारियों से बचाव, बेहतर जीवन गुणवत्ता और सुरक्षित भविष्य की दिशा में प्रेरित करेगा।
एडल्ट वैक्सीनेशन न केवल इन उच्च जोखिम समूहों को सुरक्षित करता है, बल्कि रोग के प्रसार, महामारी, अस्पताल में भर्ती, अनावश्यक एंटीबायोटिक उपयोग और आर्थिक नुकसान को भी कम करता है। यही कारण है कि स्वस्थ वृद्धावस्था, उत्पादक कार्यबल और मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए वयस्क टीकाकरण को एक प्रभावी निवारक उपाय माना जाता है।
वयस्कों के लिए टीकाकरण क्यों है बेहद जरूरी?
अक्सर यह माना जाता है कि टीकाकरण केवल बच्चों के लिए आवश्यक होता है, लेकिन सच्चाई यह है कि वयस्कों और बुज़ुर्गों के लिए टीके उतने ही महत्वपूर्ण हैं, बल्कि कई मामलों में उससे भी अधिक जरूरी होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है, जिससे संक्रमण और बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।
कमज़ोर प्रतिरक्षा के कारण कई टीका-निवारणीय रोग गंभीर रूप ले सकते हैं, जिनसे जटिलताएं, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना और यहां तक कि मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में वयस्क टीकाकरण न केवल व्यक्ति को सुरक्षित रखता है, बल्कि समाज में संक्रमण के फैलाव को भी रोकने में मदद करता है।
टीके लगवाने से शरीर की इम्यूनिटी बनी रहती है और जीवन भर बीमारियों से बचाव संभव होता है। साथ ही, टीकाकरण समुदाय को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
वयस्कों के लिए 7 जरूरी टीके
1. इन्फ्लुएंजा (फ्लू) वैक्सीन
किससे बचाव करता है: यह टीका इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाले फ्लू से सुरक्षा प्रदान करता है।
क्यों जरूरी है: फ्लू को अक्सर सामान्य बीमारी समझ लिया जाता है, लेकिन इलाज न होने पर यह निमोनिया जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, खासकर बुज़ुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में। हर साल फ्लू का टीका लगवाने से संक्रमण का खतरा 40–60% तक कम हो सकता है और अगर संक्रमण हो भी जाए तो लक्षण हल्के रहते हैं।
कब और कितनी बार: सभी वयस्कों को साल में एक बार, आमतौर पर मानसून से पहले, फ्लू का टीका या नाक के स्प्रे के रूप में वैक्सीन लगवानी चाहिए।
2. दाद (हर्पीज़ ज़ोस्टर) वैक्सीन
किससे सुरक्षा मिलती है: यह टीका दाद (शिंगल्स) से बचाव करता है, जो वैरिसेला-जोस्टर वायरस के दोबारा सक्रिय होने से होता है।
क्यों जरूरी है: 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में दाद होने का खतरा ज्यादा होता है। यह बीमारी बेहद दर्दनाक हो सकती है और पोस्टहर्पेटिक न्यूराल्जिया जैसी गंभीर जटिलता पैदा कर सकती है, जिसमें दर्द महीनों तक बना रहता है।
कब और कितनी बार: 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोगों को यह टीका लगवाना चाहिए। प्रतिरक्षा कमजोर वयस्क (19 वर्ष से ऊपर) भी इसे लगवा सकते हैं। आमतौर पर यह 2 खुराकों में दिया जाता है, जिनके बीच 2 से 6 महीने का अंतर होता है।
3. टीडीएपी (टेटनस, डिप्थीरिया और पर्टुसिस) वैक्सीन
किससे बचाव करता है: यह एक ही टीका टेटनस, डिप्थीरिया और काली खांसी (पर्टुसिस) से सुरक्षा देता है।
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टेटनस: कट या घाव से होने वाला जानलेवा संक्रमण
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पर्टुसिस: गंभीर श्वसन संक्रमण, जो शिशुओं और बुज़ुर्गों के लिए खतरनाक
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डिप्थीरिया: गले और त्वचा को संक्रमित कर सांस लेने में बाधा और हृदय संबंधी जटिलताएं पैदा कर सकता है
कब और कितनी बार: 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वयस्कों और गर्भवती महिलाओं (27–36 सप्ताह) को यह टीका लगवाना चाहिए। इसके बाद हर 10 साल में बूस्टर डोज जरूरी होती है।
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4. न्यूमोकोकल वैक्सीन
किससे सुरक्षा मिलती है: निमोनिया, मेनिन्जाइटिस और रक्त संक्रमण जैसे गंभीर रोगों से।
किसे लगवाना चाहिए: 65 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को यह टीका लगवाना चाहिए। इसके अलावा हृदय रोग, मधुमेह, किडनी रोग, फेफड़ों की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी वाले 64 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए भी यह जरूरी है।
कब और कितनी बार: आमतौर पर यह टीका हर 5 साल में एक बार दिया जाता है।
5. कोविड-19 वैक्सीन
किससे बचाव करता है: SARS-CoV-2 वायरस से होने वाले कोविड-19 संक्रमण से।
क्यों जरूरी है: कोविड-19 ने यह साबित किया कि बुज़ुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण जानलेवा हो सकता है। नए वेरिएंट्स के चलते बूस्टर डोज़ के जरिए इम्यूनिटी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
कब और कितनी बार: 6 महीने से अधिक उम्र के सभी लोगों को कोविड-19 वैक्सीन लगवानी चाहिए। आमतौर पर दो डोज दी जाती हैं, जिनके बीच 3–8 सप्ताह का अंतर होता है।
6. एमएमआर और वैरिसेला वैक्सीन
किससे बचाव करता है: खसरा, कण्ठमाला, रूबेला और चिकनपॉक्स से।
क्यों जरूरी है: यह मानना गलत है कि बचपन में बीमारी होने के बाद जीवन भर सुरक्षा मिल जाती है। बिना टीकाकरण के वयस्कों में ये रोग इंसेफेलाइटिस, निमोनिया और बांझपन जैसी जटिलताएं पैदा कर सकते हैं।
कब और कितनी बार: जिन वयस्कों को ये बीमारियां नहीं हुई हैं या जिनकी इम्यूनिटी नहीं बनी है, उन्हें 2 डोज (4–8 सप्ताह के अंतर से) लगवानी चाहिए।
7. हेपेटाइटिस बी वैक्सीन
किससे सुरक्षा मिलती है: हेपेटाइटिस बी वायरस से, जो लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
क्यों जरूरी है: यह टीका खासतौर पर यौन रूप से सक्रिय लोगों, मधुमेह, एचआईवी, किडनी रोग से पीड़ित व्यक्तियों, हेल्थकेयर वर्कर्स और हाई-रिस्क क्षेत्रों में यात्रा करने वालों के लिए जरूरी है। हेपेटाइटिस बी लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर का कारण बन सकता है।
कब और कितनी बार: 19 से 64 वर्ष की उम्र के वयस्कों को यह टीका लगवाना चाहिए। वैक्सीन के प्रकार के अनुसार 2 या 3 डोज दी जाती हैं।
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