तब और अब… सहकार से समृद्धि तक: सरस का बदलता स्वरूप

तब और अब… सहकार से समृद्धि तक: सरस का बदलता स्वरूप

राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन का स्वर्णकाल: पार्ट-1

1957 की शुरुआत से राष्ट्रीय पहचान तक: राजस्थान की दुग्ध सहकारिता की प्रेरक यात्रा

सिर्फ 20 महीनों में 16,116 करोड़ का रिकॉर्ड टर्नओवर, लाभ में 207% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सरस मॉडल को बताया देश के लिए प्रेरणा

विजय श्रीवास्तव।

जयपुर, dusrikhabar.comजयपुर दुग्ध वितरण योजना से शुरू हुई राजस्थान की दुग्ध सहकारिता यात्रा आज एक नए शिखर पर पहुंच चुकी है। वर्ष 1957 में सीमित संसाधनों और परंपरागत ढांचे के साथ आरम्भ हुई यह व्यवस्था अब आरसीडीएफ (राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन) और उसके ब्रांड सरस के रूप में राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है। बीते दो वर्षों में हुए अभूतपूर्व परिवर्तन ने “तब” और “अब” के बीच का अंतर साफ़ तौर पर उजागर कर दिया है।

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क्या आया परिवर्तन?

बिक्री में: त्योहारी मिठाइयों से लेकर दुग्ध उत्पादों तक रिकॉर्ड बढ़ोतरी।

उत्पादन में: दुग्ध, पशु आहार और पाउडर – तीनों क्षेत्रों में क्षमता विस्तार।

आय में: पशुपालकों की आय में 58% से अधिक की वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती।

विश्वास में: सरस अब केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि शुद्धता, गुणवत्ता और सामाजिक उत्तरदायित्व का पर्याय

सरस एक राष्ट्रीय गौरव: श्रुति भारद्वाज

आरसीडीएफ की यह यात्रा साबित करती है कि जब सहकारिता, तकनीक, पारदर्शिता और मजबूत नेतृत्व एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो परिणाम केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लाखों दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं के जीवन में वास्तविक बदलाव लाते हैं।

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राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फैडरेशन की प्रशासक वरिष्ठ आईएएस श्रुति भारद्वाज ने कहा कि “तब” सरस एक आवश्यकता थी, “अब” सरस एक राष्ट्रीय गौरव बन चुका है। सरस की यह उड़ान आने वाले वर्षों में ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को और ऊंचाइयों तक ले जाने वाली है।

कैसे बदली ग्रामीण राजस्थान की तस्वीर?

राजस्थान की दुग्ध सहकारिता की यात्रा करीब 70 दशकों में जयपुर दुग्ध वितरण योजना से शुरू होकर आज आरसीडीएफ और सरस के रूप में नए कीर्तिमान गढ़ रही है। बीते करीब दो वर्षों में सरस ने न केवल उत्पादन और बिक्री के आँकड़ों में ऐतिहासिक छलांग लगाई, बल्कि महिलाओं, किसानों और पशुपालकों के जीवन में ठोस बदलाव लाकर सहकारिता के असली मायने साबित किए हैं।

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यही कारण है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक मंचों से सरस और आरसीडीएफ की उपलब्धियों की खुले दिल से सराहना की है।

आय बढ़ने से गांवों में आर्थिक स्थिरता: सीएम भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सरस को ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बताते हुए कहा कि दुग्ध सहकारिता ने लाखों पशुपालक परिवारों की आय बढ़ाकर गांवों में आर्थिक स्थिरता लाई है।

राजस्थान की दुग्ध सहकारिता देश के लिए प्रेरणा: केंद्रीय गृह मंत्री, अमित शाह

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सरस और आरसीडीएफ को सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजस्थान की दुग्ध सहकारिता देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा है।

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तब (पहले)

  • दुग्ध संकलन, प्रसंस्करण और विपणन की क्षमता सीमित थी। अगर हम वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 की बात करें तो उस समय कुल टर्नओवर 10,289 करोड़ रुपये और लाभ 222 करोड़ रुपये  रहा।
  • दुग्ध उत्पादों की रेंज और आधुनिक पैकेजिंग सीमित थी। तब त्योहारी सीजन में मिठाइयों की बिक्री अपेक्षाकृत कम रहती थी, वर्ष 2024 में दीपावली पर 125 मैट्रिक टन मिठाइयों की बिक्री हुई।
  • दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता लगभग 52 लाख लीटर प्रतिदिन और पशु आहार उत्पादन क्षमता 1800 मैट्रिक टन प्रतिदिन तक सीमित रही

अब (वर्तमान)

  • पिछले दो वर्ष में भी लगभग 20 महीनों में आरसीडीएफ ने 16,116 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टर्नओवर और 681 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक लाभ अर्जित किया। यानि टर्नओवर में 58% और लाभ में 207% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई है।
  • पिछले वर्ष 2025 में दीपावली पर सरस की शुद्ध मिठाइयों की बिक्री बढ़कर 165 मैट्रिक टन रिकॉर्ड बिक्री हुई, जो पिछले वर्ष से 32% अधिक है। वहीं सरस भारतीय सेना को देसी घी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर गुणवत्ता और भरोसे का प्रतीक बना।
  • राज्य सरकार की पहल से 1000 करोड़ रुपये का आरसीडीआईडीएफ कोरपस फंड स्वीकृत हुआ।
  • वहीं दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर 75 लाख लीटर प्रतिदिन होने जा रही है। इधर पशु आहार उत्पादन क्षमता 2550 मैट्रिक टन प्रतिदिन और मिल्क पाउडर उत्पादन क्षमता 225 मैट्रिक टन प्रतिदिन तक बढ़ाने की योजना।
  • पिछले वर्षों की तुलना में अत्याधुनिक डेयरी प्लांट, तकनीकी उन्नयन, ऑनलाइन प्रक्रियाएं और मजबूत वितरण तंत्र। 

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