
“Women in Design” से महिला सशक्तिकरण और शिल्प को नई पहचान: अर्चना सुराणा
आर्च कॉलेज का 26वां स्थापना दिवस
“Women in Design Awards” के साथ शिल्प और क्रिएटिविटी का उत्सव
महिला कारीगरों को मिला सम्मान, डिजाइन से जुड़ी नई संभावनाएं
परंपरा और आधुनिकता के संगम पर चर्चा, छात्रों ने दिखाया टैलेंट
जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर में आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस ने अपने 26वें स्थापना दिवस को “Women in Design – Artisanal Excellency Awards” के साथ खास अंदाज में मनाया। इस कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण, शिल्प परंपरा और डिजाइन नवाचार को केंद्र में रखते हुए देशभर से आए विशेषज्ञों, कारीगरों और छात्रों ने भाग लिया।

अर्चना सुरणा, संस्थापक एवं निदेशक, आर्च अकेडमी, जयपुर
दीप प्रज्वलन से शुरुआत, कॉलेज की उपलब्धियों का प्रदर्शन
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के जरिए आर्च कॉलेज की यात्रा और उपलब्धियों को दिखाया गया, जिसमें डिजाइन एजुकेशन, इनोवेशन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर किया गया।
महिलाओं और कारीगरों को सशक्त बनाने पर जोर
आर्च अकेडमी जयपुर की संस्थापक एवं निदेशक अर्चना सुराना ने कहा कि कॉलेज का उद्देश्य डिजाइन थिंकिंग के माध्यम से परंपरा और नवाचार को जोड़कर महिलाओं और कारीगर समुदाय को सशक्त बनाना है। उन्होंने संवेदनशील और जिम्मेदार डिजाइनरों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लगभग तीन दशकों से वे डिज़ाइन शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अंतरराष्ट्रीय डिज़ाइन संगठन Cumulus Executive Board की सदस्य भी हैं।
इस अवसर पर उन्होंने ऐसे रचनात्मक और संवेदनशील डिजाइनरों को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण रखते हों।

मार्केटिंग और कम्यूनिकेशन हैड मेघा जैन
आर्च अकेडमी जयपुर की मार्केटिंग और कम्यूनिकेशन हैड मेघा जैन ने कार्यक्रम के दौरान मंच का सफलतापूर्वक संचालन किया।
उन्होंने कॉलेज की शुरुआत से लेकर 26वें स्थापना दिवस तक की विकास यात्रा को एक प्रजेंटेशन के माध्यम से बखूबी दिखाया।
मेघा जैन ने इस प्रजेंटेशन में बताया कि कैसे संस्थापक और निदेशक अर्चना सुराणा ने ज्वैलरी डिजाइन की थीम से लेकर इस अकेडमी को मल्टीपल शिल्प कलाओं के लिए तैयार किया।
“Roots vs Reels” ने दिखाया परंपरा और डिजिटल युग का मेल
छात्रों द्वारा कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत “Roots vs Reels” शीर्षक से नाट्य प्रस्तुति ने परंपरा और आधुनिकता के बीच के संबंध को बेहद प्रभावशाली और सृजनात्मक ढंग से दर्शाया। इस प्रस्तुति में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और डिजिटल युग एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं, जो मिलकर नई संभावनाओं और अवसरों का निर्माण कर सकते हैं।

आर्च कॉलेज का 26वां स्थापना दिवस, पैनल चर्चा करते मुख्य अतिथि एवं अन्य एक्सपर्ट शिल्पकार महिलाएं।
क्राफ्ट और क्रिएटिव इकॉनमी पर पैनल चर्चा
पहले पैनल “Weaving the Future: Craft, Culture and Creative Economy” में पारंपरिक शिल्प को डिजाइन और रचनात्मक अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर चर्चा हुई। इस दौरान महिला कारीगरों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। इस चर्चा में विशेषज्ञों ने इस बात पर विचार साझा किए कि किस प्रकार पारंपरिक शिल्प को डिज़ाइन नवाचार, आधुनिक सोच और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि कारीगरों के लिए नए अवसर पैदा हों और उनकी कला को वैश्विक पहचान मिल सके। इस सत्र के दौरान लकड़ी शिल्प, जूट शिल्प, ज्वेलरी डिज़ाइन, हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, ठिकरी कला और तारकशी जैसी विविध पारंपरिक विधाओं से जुड़ी महिला कारीगरों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

हेरिटेज से मार्केट तक: डिजाइन की नई भूमिका
दूसरे पैनल “Heritage to Marketplace” में बताया गया कि कैसे डिजाइन पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़कर रोजगार और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा कर सकता है। इस चर्चा में यह विस्तार से बताया गया कि किस तरह डिज़ाइन की नई सोच और रणनीतियों के माध्यम से पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ा जा सकता है, जिससे कारीगरों को स्थायी आजीविका के अवसर मिल सकें और उनकी कला को व्यापक पहचान मिल सके। इस सत्र में टेराकोटा, एप्लीक एवं एम्ब्रॉयडरी, ब्लू पॉटरी, लाख शिल्प, हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग और कठपुतली कला से जुड़ी महिला कारीगरों को सम्मानित कर उनके योगदान को सराहा गया।
मुख्य अतिथियों ने की शिल्पकारों की सराहना
कार्यक्रम में डॉ. आशु चौधरी और पद्मिनी कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने महिला कारीगरों को सम्मानित करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
सहयोग और ग्रामीण विकास पर भी जोर
FORHEX की CEO सोनल चितरांशी और राजीविका की स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर रमनिका कौर ने कारीगर समुदाय के सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में आयोजित फैशन शो में छात्रों ने दिखाया कि कैसे पारंपरिक शिल्प को आधुनिक डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।
26 साल का सफर: नवाचार और विरासत का संगम
26 वर्षों की यात्रा के साथ आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस ने एक बार फिर यह साबित किया कि डिजाइन शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और नवाचार के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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