गीतांजल‍ि इंस्टिट्यूटऑफ मेडिकल साइंसेज एवं हॉस्पिटल में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट का पद एक महीने से खाली…!

गीतांजल‍ि इंस्टिट्यूटऑफ मेडिकल साइंसेज एवं हॉस्पिटल में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट का पद एक महीने से खाली…!

गीतांजल‍ि हॉस्पिटल में मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के बिना संचालन प्रभावित…!

वरिष्ठ अधिकारी से विवाद के चलते इस्तीफा

NABH–NABL विशेषज्ञ श्रीकांत स्वामी के जाने से कई चीजें प्रभावित

नवीन सक्सेना,

गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पिछले एक महीने से मेडिकल सुप्रीटेंडेंट का पद खाली है। वरिष्ठ अधिकारी से विवाद और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर उपजा तनाव अब अस्पताल प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अचानक इस्तीफा देकर गए श्रीकांत स्वामी के कारण अब अस्पताल संचालन पर भी असर दिखाई दे रहा है…!

जयपुर स्थित गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में पिछले करीब एक महीने से भी अधिक समय से हॉस्पिटल के चिकित्सा अधीक्षक (Medical Superintendent) का पद रिक्त पड़ा हुआ है। यह पद अस्पताल प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण और उच्च जिम्मेदारी वाला पद माना जाता है।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के ही एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ पद एवं कार्यों के बंटवारे को लेकर मतभेद बढ़ते गए और विवाद इतना गहरा गया कि इस तनावपूर्ण स्थिति ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट रहे श्रीकांत स्वामी को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि यह मामला अचानक नहीं था बल्कि लंबे समय से चल रहे असहमति के कारण गंभीर रूप ले चुका था।

गीतांजलि मेडिकल डायरेक्टर श्रीकांत स्वामी जयपुर GIMS

NABH–NABL विशेषज्ञ हैं डॉ. श्रीकांत स्वामी

मेडिकल सुप्रीटेंडेंट रहे श्रीकांत स्वामी इससे पहले फोर्टिस अस्पताल और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

उन्हें NABH, NABL, ब्लड बैंक प्रबंधन, और नर्सिंग प्रशासन में विशेषज्ञता प्राप्त होने के कारण अस्पतालों में एक मजबूत सिस्टम डेवलपर माना जाता है। अपने काम में दक्ष स्वामी के अचानक नौकरी छोड़कर चले जाने ने अस्पताल के अंदर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जाता है कि उनके साथ उनके दो जूनियर अधिकारियों ने भी इस्तीफा दिया था।

एक महीने से बिना सुप्रीटेंडेंट के चल रहा अस्पताल 

सूत्रों का कहना है कि स्वामी के इस्तीफ़े के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दोबारा जोड़ने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। लगातार एक महीने से मेडिकल सुप्रीटेंडेंट के न होने से अस्पताल प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर पड़ रही है। निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, विभागों के समन्वय में दिक्कतें बढ़ रही हैं। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि फिलहाल अन्य कोई भी बड़ा नाम अब इस अस्पताल में एमएस पद के लिए अपनी सहमति नहीं दे रहा है। कई दिनों से अस्पताल कुछ लोगों के लगातार सम्पर्क में है लेकिन इस पद पर आने के लिए उचित पदाधिकारी नहीं मिल पा रहा है। 

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