राजस्थान को टेक्सटाइल उद्योग का राष्ट्रीय पावरहाउस बनाने की तैयारी, निर्यात 13,500 करोड़ के पार
नई टेक्सटाइल एवं अपैरल पॉलिसी से निवेश को रफ्तार, गारमेंट उद्योग को पहली बार मिला विशेष दर्जा
न्यू एज फाइबर से बदलेगा टेक्सटाइल का भविष्य, मिल्क वीड से नवाचार की राह
1,800 से ज्यादा यूनिट्स से मजबूत हुआ सेक्टर, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर फोकस
जयपुर, dusrikhabar.com। राजस्थान को देश के अग्रणी टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर व्यापक रणनीति पर काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में लागू की गई राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल पॉलिसी-2025 ने राज्य के वस्त्र उद्योग को नई दिशा दी है। इसके सकारात्मक परिणामस्वरूप राज्य का टेक्सटाइल निर्यात बढ़कर 13,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
राजस्थान के वस्त्र उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। शासन सचिवालय में आयोजित ‘टेक्सटाइल इन राजस्थान’ विषयक बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य को एक मजबूत टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने के लिए नीतिगत और संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि निवेश को आकर्षित करने और उद्योगों को स्थायित्व देने के लिए राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल पॉलिसी-2025 लागू की गई है। इस नीति की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पहली बार शामिल किया गया है। साथ ही प्राकृतिक व सिंथेटिक फाइबर, टेक्निकल टेक्सटाइल, हैंडलूम, ऊन प्रसंस्करण, चमड़ा उद्योग और फुटवियर जैसे सहयोगी क्षेत्रों को भी इसका हिस्सा बनाया गया है।
नीति के तहत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 10 वर्षों तक प्रतिवर्ष 80 करोड़ रुपये तक का एसेट क्रिएशन इंसेंटिव सहित कई प्रोत्साहन प्रावधान तय किए गए हैं। इससे राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश और औद्योगिक विस्तार की उम्मीद की जा रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि भीलवाड़ा राज्य का प्रमुख टेक्सटाइल हब बनकर उभरा है। इसके अलावा वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत बालोतरा, कोटा, पाली और बाड़मेर जैसे जिलों के पारंपरिक और आधुनिक वस्त्र उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं, वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने बैठक में बताया कि राजस्थान में न्यू एज फाइबर के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। राज्य में व्यापक रूप से पाए जाने वाले मिल्क वीड पौधे से प्राप्त फाइबर का उपयोग कर टेक्सटाइल उद्योग में नए और टिकाऊ उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं। इससे न केवल इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल टेक्सटाइल को भी नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में अनुसंधान और नवाचार को सक्रिय समर्थन दे रही है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार कारीगरों और टेक्सटाइल उद्योग को सशक्त बनाने के लिए स्किल डेवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और वित्तीय सहयोग पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे एमएसएमई सेक्टर के साथ-साथ बड़े उद्योगों को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में राजस्थान में 1,800 से अधिक टेक्सटाइल और अपैरल यूनिट्स सक्रिय हैं। आधुनिक तकनीक और उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाते हुए राज्य के टेक्सटाइल सेक्टर के सतत विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक स्पष्ट रोडमैप पर काम किया जा रहा है। इसका असर यह है कि वर्ष 2024-25 में टेक्सटाइल निर्यात बढ़कर करीब 13,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश कुमार ओला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
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