रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर सहित अन्य स्टाफ भी शराब के नशे में कर रहा नौकरी; ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में 239 मामले आए सामने…!

रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर सहित अन्य स्टाफ भी शराब के नशे में कर रहा नौकरी; ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में 239 मामले आए सामने…!

उत्तर पश्चिम रेलवे में शराब जांच के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, 239 मामले आए सामने

ड्यूटी से पहले की जांच में 185 कर्मचारी पकड़े गए

जयपुर मंडल 121 मामलों के साथ पहले स्थान पर, जबकि जोधपुर मंडल दूसरे स्थान पर 

लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर की श्रेणियों में भी बड़ी संख्या में मामले

RTI से सामने आई जानकारी ने रेल सुरक्षा पर उठाए सवाल

विजय श्रीवास्तव

जयपुर, dusrikhabar.com। हजारों यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने की जिम्मेदारी रेलवे कर्मचारियों के कंधों पर होती है। ऐसे में ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों की सतर्कता और शारीरिक-मानसिक फिटनेस का महत्व और बढ़ जाता है। उत्तर पश्चिम रेलवे में ब्रेथ एनालाइजर से शराब जांच के दौरान सामने आए आंकड़े इसी जिम्मेदारी को लेकर चिंता पैदा करते हैं। वर्ष 2025 से अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक शराब जांच में असफलता के 239 मामले दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक 121 मामले जयपुर मंडल के हैं, जबकि जोधपुर मंडल दूसरे स्थान पर बताया गया है।

ड्यूटी शुरू होने से पहले 185 मामलों का सामने आना अहम

रेलवे में ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों की ड्यूटी शुरू होने से पहले और ड्यूटी समाप्त होने पर ब्रेथ एनालाइजर से जांच की जाती है। ड्यूटी शुरू करने से पहले होने वाली जांच को ‘साइन ऑन’ टेस्ट कहा जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में इस जांच में असफलता के 100 मामले दर्ज हुए, जबकि 2026 में अक्टूबर की शुरुआत तक 85 मामले सामने आए।

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इस तरह दोनों अवधियों में ड्यूटी शुरू होने से पहले जांच में असफलता के 185 मामले दर्ज हुए। यह कुल 239 मामलों का लगभग 77 प्रतिशत है। ड्यूटी संभालने से पहले ही इतनी बड़ी संख्या में मामले सामने आना रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। हालांकि, इन आंकड़ों से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि संबंधित कर्मचारियों ने शराब के प्रभाव में ट्रेन चलाई, क्योंकि साइन ऑन जांच का उद्देश्य ड्यूटी शुरू होने से पहले ही ऐसे मामलों की पहचान करना है।

जयपुर मंडल में सबसे ज्यादा 121 मामले

उत्तर पश्चिम रेलवे के कार्यक्षेत्र में जयपुर, अजमेर, जोधपुर और बीकानेर मंडल आते हैं। इसका प्रमुख नेटवर्क राजस्थान में फैला है, जबकि हरियाणा, पंजाब और गुजरात के कुछ रेलमार्ग भी इसके अंतर्गत आते हैं।

RTI से मिली जानकारी के अनुसार, जयपुर मंडल में 121 मामले दर्ज हुए, जो चारों मंडलों में सबसे अधिक हैं। जोधपुर मंडल दूसरे स्थान पर रहा। ये आंकड़े बताते हैं कि रेल संचालन से जुड़े कर्मचारियों की जांच और सुरक्षा मानकों के पालन की नियमित निगरानी कितनी आवश्यक है। मंडलवार विस्तृत तुलना और कारणों का आकलन करने के लिए संबंधित मंडलों के अलग-अलग आंकड़ों तथा विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।

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ड्यूटी खत्म होने पर जांच में भी 42 मामले

शराब जांच में असफलता के मामले केवल ड्यूटी शुरू होने से पहले तक सीमित नहीं रहे। आंकड़ों के अनुसार, ड्यूटी समाप्त होने के समय की जांच में 42 मामले दर्ज हुए। इनमें 2025 के 28 और 2026 में अक्टूबर की शुरुआत तक के 14 मामले शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त 12 प्रविष्टियां एक अलग जांच श्रेणी में दर्ज की गईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ये प्रविष्टियां जयपुर मंडल में वरिष्ठ सहायक लोको पायलट की श्रेणी से संबंधित हैं।

इन आंकड़ों को समझते समय अलग-अलग जांच श्रेणियों के बीच अंतर करना जरूरी है। जांच में असफलता के मामले सामने आना और किसी कर्मचारी का शराब के प्रभाव में ट्रेन चलाना दो अलग स्थितियां हैं। इसलिए वास्तविक जोखिम का आकलन इस आधार पर भी होना चाहिए कि जांच के बाद कितने कर्मचारियों को ड्यूटी से रोका गया और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई।

लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की श्रेणियों में 141 मामले

ट्रेन संचालन में लोको पायलट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों में लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की विभिन्न श्रेणियों से जुड़े 141 मामले दर्ज हैं। इनमें मालगाड़ी, मेल-एक्सप्रेस और यात्री ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट के साथ सहायक और वरिष्ठ सहायक लोको पायलट की श्रेणियां शामिल हैं।

इसके अलावा ट्रेन मैनेजर की विभिन्न श्रेणियों में 98 मामले सामने आए। वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कुल 128 और 2026 में अक्टूबर की शुरुआत तक 111 मामले दर्ज हुए।

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ये आंकड़े बताते हैं कि जांच व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। हालांकि, इन श्रेणियों के आंकड़ों को कुल मामलों के साथ जोड़कर देखने से पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अलग-अलग वर्गीकरणों में कोई मामला दोहराया तो नहीं गया है। इससे आंकड़ों की सही व्याख्या और अधिक प्रभावी होगी।

आठ घंटे का नियम और विभागीय कार्रवाई का प्रावधान

रेलवे के नियमों के अनुसार, ड्यूटी शुरू होने से पहले निर्धारित अवधि में शराब का सेवन प्रतिबंधित है। उपलब्ध जानकारी में ड्यूटी शुरू होने से आठ घंटे पहले शराब नहीं पीने के नियम का उल्लेख है। ड्यूटी के दौरान शराब सेवन भी प्रतिबंधित है। जांच में असफलता की स्थिति में कर्मचारी को ड्यूटी से रोका जा सकता है और लागू नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। गंभीर मामलों में कठोर दंड, यहां तक कि सेवा से बर्खास्तगी तक का प्रावधान हो सकता है।

ऐसे मामलों में कार्रवाई का स्वरूप संबंधित नियमों, जांच के निष्कर्षों और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए जांच में असफलता के प्रत्येक मामले में अपनाई गई प्रक्रिया और अंतिम कार्रवाई की जानकारी भी सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करने के लिए उपयोगी होगी।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए जांच व्यवस्था का प्रभावी होना जरूरी

रेलवे में सुरक्षा केवल तकनीक, सिग्नल और पटरियों के रखरखाव से सुनिश्चित नहीं होती। इसमें ट्रेन संचालन से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी की सतर्कता, अनुशासन और जिम्मेदारी भी अहम भूमिका निभाते हैं। ब्रेथ एनालाइजर जांच का उद्देश्य संभावित जोखिम को ट्रेन संचालन शुरू होने से पहले पहचानना है, ताकि यात्रियों और रेलकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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ऐसे में जरूरी है कि जांच प्रक्रिया नियमित और पारदर्शी रहे, नियमों का समान रूप से पालन हो तथा किसी भी उल्लंघन पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, आंकड़ों का विश्लेषण कर यह भी देखा जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में मामले सामने आ रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए कौन से अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं।

आखिरकार, रेल सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना यही है कि यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकें। ड्यूटी से पहले जांच में सामने आने वाले मामलों को समय रहते रोकना और उनसे सबक लेकर व्यवस्था को मजबूत करना रेलवे की सुरक्षा जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।

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सूचना:- खबर का प्रकाशन; दैनिक हिंदी समाचार पत्र में प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित, साथ ही यह जानकारी नीमच निवासी चंद्रशेखर गौड़ की ओर से सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आई है। 

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