
हिंदुस्तान जिंक की आय में ऐतिहासिक उछाल, दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड प्रदर्शन; चांदी उत्पादन 20% बढ़ा
हिंदुस्तान जिंक में दूसरी तिमाही में ₹15,093 करोड़, सालाना आधार पर 77% वृद्धि
कंपनी के अनुसार, सालाना आधार पर 142% की बढ़ोतरी के साथ शुद्ध लाभ में वृद्धि
जिंक उत्पादन लागत में कमी: रॉयल्टी को छोड़कर लागत 703 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रही
चांदी उत्पादन बढ़ा: दूसरी तिमाही में 173 टन, सालाना आधार पर 20% अधिक
सोनिया
उदयपुर,dusrikhabar.com। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 10 चांदी उत्पादकों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। कंपनी ने ₹15,093 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक तिमाही परिचालन राजस्व दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 77% अधिक है; ₹9,285 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक तिमाही EBITDA, जो सालाना आधार पर 108% अधिक है; और ₹11,881 करोड़ का रिकॉर्ड तिमाही शुद्ध लाभ, जो सालाना आधार पर 142% अधिक है। कम जिंक उत्पादन लागत, चांदी के बढ़ते उत्पादन और परिचालन क्षमता में सुधार ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रिकॉर्ड उत्पादन और कम लागत ने मजबूत किए वित्तीय नतीजे
हिंदुस्तान जिंक के दूसरी तिमाही के प्रदर्शन में उत्पादन क्षमता और लागत प्रबंधन की अहम भूमिका रही। कंपनी ने इस अवधि में 271 किलो टन खनित धातु उत्पादन दर्ज किया, जबकि परिष्कृत धातु का उत्पादन 264 किलो टन रहा। दोनों आंकड़े संबंधित दूसरी तिमाही के लिए कंपनी के रिकॉर्ड प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
इसके साथ ही, रॉयल्टी को छोड़कर जिंक की उत्पादन लागत घटकर 703 अमेरिकी डॉलर प्रति टन रही। खनन उद्योग में उत्पादन लागत का सीधा संबंध परिचालन दक्षता और लाभप्रदता से होता है। ऐसे में लागत को नियंत्रित रखने के साथ उत्पादन बढ़ाना कंपनी के वित्तीय नतीजों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
कंपनी के अनुसार, दूसरी तिमाही में परिचालन राजस्व ₹15,093 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 77 प्रतिशत अधिक है। वहीं, EBITDA 108 प्रतिशत बढ़कर ₹9,285 करोड़ पहुंच गया। ये आंकड़े कंपनी के मजबूत परिचालन प्रदर्शन को सामने रखते हैं।
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चांदी उत्पादन में 20% की वृद्धि, कारोबार को मिला सहारा
जिंक के साथ चांदी का उत्पादन भी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में चांदी उत्पादन 173 टन दर्ज किया गया, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत अधिक है।
चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए इसकी मांग और बाजार कीमतों में होने वाले बदलाव उत्पादक कंपनियों के राजस्व तथा लाभप्रदता को प्रभावित कर सकते हैं। हिंदुस्तान जिंक ने अपने प्रदर्शन में चांदी के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया है।
हालांकि, किसी भी तिमाही के वित्तीय परिणामों का आकलन करते समय उत्पादन के साथ धातुओं की बाजार कीमतों, बिक्री और अन्य परिचालन कारकों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
छमाही में EBITDA ₹17,359 करोड़, नकदी प्रवाह भी मजबूत
30 सितंबर 2026 को समाप्त पहली छमाही के लिए कंपनी ने ₹17,359 करोड़ का EBITDA दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 108 प्रतिशत अधिक बताया गया है। कंपनी ने 60 प्रतिशत EBITDA मार्जिन हासिल करने की भी जानकारी दी है।
इसके अतिरिक्त, दूसरी तिमाही में विकास पूंजीगत व्यय यानी ग्रोथ कैपेक्स से पहले फ्री कैश फ्लो ₹6,389 करोड़ रहा। फ्री कैश फ्लो कंपनी की उस नकदी को दर्शाता है, जो परिचालन गतिविधियों और संबंधित पूंजीगत खर्चों के बाद उपलब्ध होती है। मजबूत नकदी प्रवाह भविष्य की विकास योजनाओं, निवेश और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी हो सकता है।
कंपनी के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि खनन उद्योग में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप परिचालन विकसित करने के लिए निरंतर निवेश की जरूरत होती है।
क्रिटिकल मिनरल्स में विस्तार, नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ा जोर
हिंदुस्तान जिंक ने अपने पारंपरिक जिंक और चांदी कारोबार के साथ क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया है। कंपनी को कर्नाटक में गुंडलुपेट रेयर अर्थ एलिमेंट एवं यिट्रियम ब्लॉक के लिए लेटर ऑफ इंटेंट यानी आशय पत्र प्राप्त हुआ है।
रेयर अर्थ एलिमेंट और यिट्रियम जैसे खनिज आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स और विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोगी हैं। इन क्षेत्रों में विस्तार कंपनी के कारोबार में विविधता लाने की संभावनाएं खोल सकता है। हालांकि, आशय पत्र मिलना अपने आप में खनिज ब्लॉक का पूर्ण परिचालन शुरू होने के समान नहीं है।
दूसरी ओर, कंपनी ने ऊर्जा उपयोग में बदलाव की जानकारी देते हुए बताया कि उसकी कुल बिजली खपत में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही, कंपनी का जिंक एलॉय संयंत्र अपनी 100 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त कर रहा है।
यह पहल औद्योगिक उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
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CEO अमरेंदु प्रकाश बोले—तकनीक और अनुशासित विकास पर रहेगा फोकस
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि रिकॉर्ड खनित और परिष्कृत धातु उत्पादन कंपनी के परिचालन, परिसंपत्तियों और कर्मचारियों की क्षमता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि कंपनी ऊर्जा परिवर्तन को समर्थन देने के लिए अनुशासित विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नवाचार और क्रिटिकल मिनरल्स पोर्टफोलियो के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके साथ ही, कंपनी का उद्देश्य हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है।
खनन क्षेत्र में AI और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने और परिचालन संबंधी निर्णयों में सहायता कर सकता है। ऐसे में इन तकनीकों पर कंपनी का जोर भविष्य की विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
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खनन उद्योग के लिए क्या मायने रखता है यह प्रदर्शन?
हिंदुस्तान जिंक के तिमाही नतीजे उत्पादन, लागत नियंत्रण, चांदी कारोबार और ऊर्जा रणनीति के बीच संबंध को रेखांकित करते हैं। रिकॉर्ड धातु उत्पादन और कम जिंक उत्पादन लागत ने कंपनी की परिचालन स्थिति को मजबूती दी है, जबकि क्रिटिकल मिनरल्स में विस्तार कारोबार के नए अवसरों की संभावना दर्शाता है।
मानवीय और व्यापक औद्योगिक दृष्टिकोण से देखें तो खनन कंपनियों का प्रदर्शन केवल मुनाफे तक सीमित नहीं होता। उत्पादन क्षमता का विस्तार, कर्मचारियों की सुरक्षा, स्थानीय समुदायों के लिए अवसर, संसाधनों का जिम्मेदार इस्तेमाल और पर्यावरणीय प्रभाव भी उतने ही महत्वपूर्ण पहलू हैं।
आने वाली तिमाहियों में कंपनी की प्रगति इस बात से भी आंकी जाएगी कि वह अपने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को टिकाऊ विकास, ऊर्जा दक्षता और जिम्मेदार खनन के लक्ष्यों के साथ किस तरह आगे बढ़ाती है।
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