
गीतांजलि उदयपुर के डॉ. अक्षय तोषनीवाल को राष्ट्रीय सम्मान,महंगे किफायती वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप चर्चा में…
एम्स, नई दिल्ली में आयोजित नेशनल एयरवे कॉन्फ्रेंस में नवाचार को प्रथम पुरस्कार
स्मार्टफोन से जुड़ने वाला वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप किया गया विकसित
वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप से मेडिकल प्रशिक्षण में मिलेगी मदद
तकनीक को आगे विकसित करने के साथ अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए करेंगे आवेदन
सोनिया
उदयपुर dusrikhabar.com। चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार का वास्तविक महत्व तब बढ़ जाता है, जब वह बेहतर उपचार और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण को अधिक सुलभ बनाने में मदद करे। इसी दिशा में गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर के एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अक्षय तोषनीवाल ने एक किफायती वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप विकसित किया है।
डॉ तोषनीवाल के इस नवाचार को एम्स, नई दिल्ली में आयोजित नेशनल एयरवे कॉन्फ्रेंस 2026 में इनोवेशन श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह कॉन्फ्रेंस 9 से 11 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हुई।
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कम लागत वाली तकनीक से मेडिकल प्रशिक्षण को मिल सकता है नया विकल्प
चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक उपकरणों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से सांस की नली में ट्यूब डालने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में सही दृश्य मिलना चिकित्सकों के लिए उपयोगी होता है। वहीं, मेडिकल विद्यार्थियों के लिए इस प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखना और समझना उनके व्यावहारिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा है।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप विकसित किया गया है। यह उपकरण स्मार्टफोन से जुड़ सकता है, जिससे सांस की नली का दृश्य मोबाइल स्क्रीन पर देखा जा सकता है। इस तरह प्रक्रिया को समझने और मेडिकल विद्यार्थियों को उसका प्रशिक्षण देने में सहायता मिल सकती है।
इस नवाचार की खास बात इसकी किफायती तकनीक है। महंगे वीडियो लैरिंगोस्कोप के मुकाबले कम लागत वाला विकल्प तैयार करने का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा में तकनीकी संसाधनों की सुलभता बढ़ाना है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता और प्रदर्शन का आकलन आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर किया जाना होगा।
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विद्यार्थियों से लेकर विशेषज्ञों तक के प्रशिक्षण में मदद मिलने की संभावनाएं
आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में केवल सैद्धांतिक जानकारी पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को प्रक्रियाओं को देखकर समझने और उनका व्यावहारिक ज्ञान विकसित करने के अवसर भी चाहिए। ऐसे में स्मार्टफोन आधारित वीडियो तकनीक मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण के लिए एक उपयोगी विकल्प बन सकती है।
इस उपकरण की सहायता से शिक्षक और विशेषज्ञ सांस की नली में ट्यूब डालने की प्रक्रिया को स्क्रीन पर दिखाकर समझा सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को समझने में मदद मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षण के दौरान दृश्य उपलब्ध होने से शिक्षण और संवाद की प्रक्रिया को भी अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं हैं।
फिर भी, किसी भी नए चिकित्सा उपकरण की तरह इसके सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए तकनीकी गुणवत्ता, विश्वसनीयता तथा संबंधित वैज्ञानिक मानकों का परीक्षण जरूरी होगा।
इमरजेंसी और आईसीयू में उपयोग से पहले जरूरी होंगे वैज्ञानिक परीक्षण
किफायती चिकित्सा उपकरणों का विकास उन संस्थानों के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां आधुनिक तकनीक तक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता है। हालांकि, किसी उपकरण का प्रशिक्षण में उपयोग और वास्तविक मरीजों के उपचार में उपयोग अलग-अलग स्तर की जिम्मेदारियां हैं।
इसलिए, विकसित वाई-फाई वीडियो लैरिंगोस्कोप की संभावित उपयोगिता का आकलन आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी सुधारों के बाद किया जा सकेगा। भविष्य में इमरजेंसी, आईसीयू और अन्य चिकित्सा विभागों में इसके संभावित इस्तेमाल की भी पड़ताल की जा सकती है।
इस नवाचार को आगे विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए आवेदन करने की योजना भी बनाई गई है। इससे तकनीक को बेहतर बनाने, उसकी उपयोगिता का विस्तार करने और चिकित्सा क्षेत्र में उसके संभावित योगदान को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
राष्ट्रीय पुरस्कार से गीतांजलि में चिकित्सा अनुसंधान को पहचान
एम्स, नई दिल्ली में आयोजित नेशनल एयरवे कॉन्फ्रेंस में मिला प्रथम पुरस्कार डॉ. अक्षय तोषनीवाल के नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। साथ ही, यह उपलब्धि गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी विकास से जुड़े प्रयासों को भी सामने लाती है।
चिकित्सा क्षेत्र में ऐसे नवाचारों की अहमियत केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं होती। उनकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होती है कि वे वैज्ञानिक कसौटियों पर कितने खरे उतरते हैं और भविष्य में मरीजों की देखभाल, चिकित्सकों के प्रशिक्षण तथा स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में कितना योगदान दे पाते हैं।
बहरहाल किफायती चिकित्सा तकनीक विकसित करने का प्रयास स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में एक संभावित कदम है। यदि आगे के परीक्षणों में यह उपकरण प्रभावी और सुरक्षित साबित होता है, तो मेडिकल प्रशिक्षण में इसके उपयोग की नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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