‘सरस’ ने बदली गांवों की तस्वीर, महिला सशक्तिकरण से किसान सम्मान तक नई क्रांति, RCDF का स्वर्णकाल: Part-2

‘सरस’ ने बदली गांवों की तस्वीर, महिला सशक्तिकरण से किसान सम्मान तक नई क्रांति, RCDF का स्वर्णकाल: Part-2

सरस से समृद्धि तक राजस्थान के गांव और किसान परिवार

महिला दुग्ध समितियों और DBT से बढ़ी आत्मनिर्भरता, गांव-गांव में आर्थिक मजबूती

तकनीक और पारदर्शिता से पशुपालकों की आय में 58% से ज्यादा बढ़ोतरी

सरस’ से जुड़कर किसान बने सम्मानित भागीदार, राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक पहचान

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर, dusrikhabar.com।  राजस्थान में दुग्ध सहकारिता का चेहरा बदल चुका है। RCDF (राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी फेडरेशन) और सरस डेयरी अब सिर्फ दूध सप्लाई का माध्यम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, किसान समृद्धि और ग्रामीण विकास का मजबूत मॉडल बन चुके हैं। “तब और अब” के इस बदलाव में न केवल आय बढ़ी है, बल्कि किसानों और महिलाओं को समाज में नई पहचान और सम्मान भी मिला है।

read also:कैसा रहेगा आपका आज, क्या कहता है भाग्यांक? 6 अप्रेल, सोमवार, 2026

राजस्थान की दुग्ध सहकारिता में आए बदलाव को अगर गहराई से समझें, तो साफ होता है कि RCDF का यह दौर “स्वर्णकाल” क्यों कहा जा रहा है। पहले जहां किसान सिर्फ दूध बेचने तक सीमित थे, वहीं अब वे सहकारिता के निर्णयकर्ता और सम्मानित भागीदार बन चुके हैं। यही कारण है अब सरस से जुड़े किसान परिवार पिछले दो साल के समय को RCDF और किसानों के स्वर्णकाल की संज्ञा दे रहे हैं। 

read also:तब और अब… सहकार से समृद्धि तक: सरस का बदलता स्वरूप

महिला सशक्तिकरण बना सबसे बड़ा बदलाव

महिला दुग्ध उत्पादक समितियों के गठन से गांव-गांव में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए दूध बिक्री का पैसा सीधे खातों में पहुंच रहा है। प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास से महिलाएं समिति संचालन और उद्यमिता सीख रही हैं। इसका ये असर हुआ कि:

  • महिलाओं की नियमित आय सुनिश्चित हुई
  • परिवार और समाज में निर्णय लेने की भूमिका मजबूत हुई
  • आत्मविश्वास और स्वरोज़गार के अवसर बढ़े

सरस से समृद्धि तक

read also:नागौर के नए कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने ली बैठक, जनहित-समयबद्ध कार्य पर…

किसानों और पशुपालकों की आय में बड़ा उछाल

पारदर्शी दूध खरीद व्यवस्था और समय पर भुगतान ने पशुपालकों का भरोसा मजबूत किया है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाया इससे उनके परिवार में भी समृद्धि आई है। पशु आहार उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और उत्पादन बढ़ाने के तकनीकी कार्यक्रम और श्वेत क्रांति 2.0 के तहत ऑनलाइन प्रक्रियाओं का विस्तार हुआ है। इसका ये असर हुआ कि:

  • आय में 58% से अधिक वृद्धि
  • उत्पादन बढ़ा, लागत घटी, मुनाफा बढ़ा
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व और रोजगार के नए अवसर

सम्मान ने बदली किसानों की पहचान

अब सरस डेयरी से जुड़ा किसान सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि सम्मानित उद्यमी बन चुका है। वाे न सिर्फ अपने गांव के विकास में भागीदार बना है बल्कि सरस के साथ उसका भी भविष्य संवरता नजर आ रहा है। RCDF और किसानों को पिछले कुछ समय में  प्रमुख सम्मान प्राप्त हुए हैं इनमें :

  • राज्य स्तरीय सर्वश्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक सम्मान
  • राष्ट्रीय गोपाल रत्न / पशुपालक सम्मान
  • महिला दुग्ध उत्पादक सम्मान
  • प्रगतिशील किसान / नवाचार पुरस्कार
  • सहकारिता नेतृत्व सम्मान 
  • भारतीय सेना ने सरस की गुणवत्ता के लिए लिए दिया प्रशंसा पत्र

इसका ये असर हुआ कि गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा में सुधार, युवाओं का डेयरी सेक्टर की ओर रुझान, गांव स्तर पर नेतृत्व और विश्वास मजबूत हुआ है। 

read also:कोटा: ओम बिरला ने किया जल संसाधन भवन का लोकार्पण, मंत्री सुरेश रावत…

दुग्ध किसानों के लिए प्रमुख योजनाएं 

RCDF ने राजस्थान के दुग्ध किसान परिवारों की जीवनशैली में और सुधार लाने के लिए कुछ विकास और संबल योजनाओं की शुरुआत की जिसमें किसानों के जीवन स्तर में न सिर्फ सुधार किया बल्कि उन्हें सुरक्षा और संबल भी प्रदान किया।

  • राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना
  • सरस सामुहिक आरोग्य बीमा योजना
  • सरस मायरा योजना 
  • चारा बीज वितरण योजना 
  • उच्च गुणवत्ता युक्त पशु आहार उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने की योजना 
  • सरस लाडो योजना (किसान परिवार की बेटियों के लिए)

हर दुग्ध उत्पादक बनेगा सरस की सफलता की कहानी का भागीदार

आरसीडीएफ प्रबंधक एवं प्रशासक श्रुति भारद्वाजआरसीडीएफ की प्रशासक एवं प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज ने कहा कि संस्था की यह निरंतर प्रगति नवाचार, उच्च गुणवत्ता और मजबूत सहकारिता के सफल समन्वय का परिणाम है। अत्याधुनिक तकनीक और मशीनरी के उपयोग, सख्त गुणवत्ता मानकों तथा सरस मिठाइयों सहित नए-नए उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला ने सरस को उपभोक्ताओं के और अधिक करीब ला दिया है। आज सरस केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि भरोसे, शुद्धता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है।

उन्होंने आगे कहा कि “आरसीडीएफ 2047” विज़न के तहत एक ऐसे भविष्य की परिकल्पना की गई है, जहां राजस्थान का दुग्ध सहकार न सिर्फ देश में अग्रणी भूमिका निभाए, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाए। संस्था लगातार अपने टर्नओवर, विस्तार और प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाते हुए उस दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां प्रदेश का हर दुग्ध उत्पादक इस सफलता की कहानी का भागीदार बने।

read also:जयपुर में विदेशी महिला से छेड़छाड़: जापान से आई थी घूमने, 5 लड़कों ने की गंदी हरकत, CCTV में दिखे आरोपी

तब और अब, अंतर साफ दिखता है:

तब (पहले) अब (वर्तमान)
सीमित आय और पहचान सम्मान और स्थायी आय
केवल दूध बेचने तक सीमित निर्णयकर्ता और भागीदार
कम अवसर और प्रोत्साहन राज्य-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

नेतृत्व और विज़न का असर

केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं पशुपालन गोपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत के नेतृत्व में वरिष्ठ IAS श्रुति भारद्वाज के सहकारिता विज़न ने इस बदलाव को गति दी है।

  • किसानों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया गया
  • सहकार से समृद्धि” को जमीनी स्तर पर लागू किया गया

read also:देश का तीसरा दिव्यांग पार्क कोटा में बनेगा: 30 करोड़ के विकास पथ का शिलान्यास, स्पीकर बिरला बोले- रेल-रोड-एयर कनेक्टिविटी बनेगी वरदान

सरस डेयरी और RCDF की यह कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि बदलाव की असली मिसाल है। आज राजस्थान में किसान केवल दूध उत्पादक नहीं, बल्कि सम्मानित उद्यमी, सशक्त नागरिक और विकास के भागीदार बन चुके हैं। यह मॉडल साबित करता है कि सही नीतियां, तकनीक और भरोसा मिल जाए, तो सहकारिता लाखों जिंदगियां बदल सकती है।

—————– 

#SarsDairy, #RCDF, #WomenEmpowerment, #FarmersProsperity, #RajasthanNews, #DairyDevelopment, #CooperativeModel, सरस डेयरी राजस्थान, RCDF स्वर्णकाल, महिला सशक्तिकरण, दुग्ध सहकारिता, किसान आय वृद्धि

CATEGORIES
TAGS
Share This

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus ( )

अपने सुझाव हम तक पहुंचाएं और पाएं आकर्षक उपहार

खबरों के साथ सीधे जुड़िए आपकी न्यूज वेबसाइट से हमारे मेल पर भेजिए आपकी सूचनाएं और सुझाव: dusrikhabarnews@gmail.com