सिर्फ स्टॉल नहीं, स्ट्रैटेजी चाहिए: ITB 2026 में राजस्थान का इम्तिहान…!

सिर्फ स्टॉल नहीं, स्ट्रैटेजी चाहिए: ITB 2026 में राजस्थान का इम्तिहान…!

बर्लिन में मौजूदगी या वैश्विक रणनीति? राजस्थान पर्यटन के सामने असली चुनौती

इंटरनेशनल ट्रेवल मार्ट में ‘पार्टिसिपेशन’ के साथ ‘आउटकम’ पर फोकस की जरूरत

ITB 2026: राजस्थान पर्यटन के लिए अवसर, आत्ममंथन और बदलाव का वक्त

प्रचार-प्रसार की कमी और एजेंटों की सीमित भागीदारी

राजस्थान की ‘उपस्थिति’ नहीं, ‘परिणाम’ चाहिए

विजय श्रीवास्तव,

जयपुर,dusrikhabar.com। जर्मनी में कल से शुरू हो रहे ITB बर्लिन में एक बार फिर राजस्थान पर्यटन अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। वर्षों से यह विभाग दुनिया के सबसे बड़े ट्रेवल मार्ट्स में भाग लेता आया है, लेकिन इस बार पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता द्वारा पूछे गए ‘आउटकम’ के सवाल ने पूरे महकमे को आत्ममंथन के लिए मजबूर कर दिया है।

सवाल केवल भागीदारी का नहीं, बल्कि यह है कि क्या इन आयोजनों से राजस्थान में पर्यटकों की वास्तविक आवक बढ़ रही है? क्या दुनिया के ट्रैवल एजेंटों और पर्यटकों के मन में भारत का नाम आते ही राजस्थान सबसे पहले याद आता है?

औपचारिक भागीदारी या ठोस रणनीति? ITB बर्लिन में मौजूदगी, लेकिन प्रभाव सीमित

सूत्रों की मानें ताे राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से दुनियाभर में आयोजित सबसे बड़े पांच ट्रेवल मार्ट में पार्टिसिपेशन तो किया जाता है लेकिन केवल फौरी तौर पर।

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आपकाे यह जानकार आश्चर्य होगा कि इन ट्रैवल मार्ट में राजस्थान पर्यटन का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी अभी तक केवल एक-दो सेशन ही ज्वॉइन करते आए हैं, जिसके कारण पर्यटकों तक राजस्थान का ठीक से प्रचार प्रसार नहीं हो पाया। पर्यटन से जुड़े एक ट्रैवल एजेंट ने नाम नहीं बताने की शर्त पर खुलासा किया कि राजस्थान ट्यूरिज्म के ज्यादातार अफसर तो केवल अपना होलीडे ट्यूर मनाने विदेश दौरों पर जाते हैं। ट्रेवल मार्ट की शुरुआत में एक दिन उद्घाटन समारोह के दौरान वो मौजूद रहते हैं उसके बाद अपनी विदेश यात्रा को एंजॉय करते हैं।

एक ट्रैवल एजेंट ने  ITB बर्लिन में पिछली बार ट्यूर का खुलासा करते हुए बताया कि पर्यटन विभाग की ओर से यहां एक पीआर कंपनी हायर की थी जो कि वहां मौजूद अन्य ट्रैवल एजेंटों से मीटिंग अरेंज करने, राजस्थान पर्यटन का प्रचार प्रसार करने का काम करती है। लेकिन इसमें केवल फौरी कार्रवाई होती रही है। पीआर कंपनी तीन दिन के ट्रैवल मार्ट में पहले दिन कुछ लोगों की मीटिंग अरेंज करवाती है उसके बाद उसका भी काम खत्म और पर्यटन अधिकारियों  का भी काम खत्म हो जाता था और ऐसा हर बार होता रहा है।

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‘मार्ट’ को पर्यटन उत्सव बनाने की जरूरत, इन सुधारों की आवश्यकता

राजस्थान में जितना पर्यटक आना चाहिए उतना नहीं आ रहा है।  उसका कारण प्रचार प्रसार का अभाव है। इंटरनेशलन ट्रैवल मार्ट में क्या क्या होना चाहिए, राजस्थान के ही एक ट्रैवल एजेंट ने नाम नहीं छापने की शर्त पर खुलासा करते हुए बताया :

  1. राजस्थान जिस भी ट्रैवल मार्ट में पार्टिसिपेट करे उसके आयोजनों की रूपरेखा पहले से तैयार हो।
  2. इंटरनेशनल या नेशनल जो भी ट्रैवल मार्ट हों उन्हें केवल घूमने का जरिया न समझें
  3. राजस्थान की तरफ से क्या क्या प्रजेंटेशन इन आयोजन में दिए जा सकते हैं और कैसे अधिकारी बारी बारी उसका वहां आने वाले ट्रैवल एजेंटों के सामने रखें यह तय होना चाहिए।
  4. पीआर एजेंसी का काम भी काफी विस्तृत होना चाहिए
  5. पीआर एजेंसी को मार्ट के दौरान और उससे पहले भी आयोजन स्थल पर प्रोपर पेम्फलेट डिस्ट्रीब्यूशन, होर्डिग्ंस,  बेनर आदि से प्रचार प्रसार का और मजबूत करना चाहिए।
  6. राजस्थान पर्यटन के प्रचार प्रसार के आयोजन स्थल में यानि पूरे ट्रैवल मार्ट में कई सारे होर्डिंग और बैनर लगाने चाहिए।
  7. पीआर कंपनी पर पर्यटन के अधिकारियों द्वारा नजर भी रखी जानी चाहिए क्योंकि पीआर कंपनी राजस्थान के खर्च पर अन्य राज्यों के ट्रैवल एजेंटों को एंटरटेन करती हैं, ऐसे में राजस्थान की तरफ आने ट्रैवल एजेंटों को ये लोग अपने स्तर पर अन्य राज्यों में डायवर्ट कर देते हैं जिसके लिए वो उन राज्यों से अलग मोटी रकम भी वसूलते हैं।
  8.  राजस्थान से पर्याप्त मात्रा में प्रचार प्रसार सामग्री इन ट्रैवल मार्ट्स में डिस्ट्रीब्यूट होनी चाहिए, सूत्रों के अनुसार कई बार तो ऐसा हुआ है कि ट्रैवल मार्ट में राजस्थान की प्रचार सामग्री बंटी ही नहीं, ऐसे में राजस्थान पर्यटन का करोड़ों रूपए लगाकर मार्ट में पार्टिसिपेट करना व्यर्थ साबित होता है।
  9. राजस्थान की स्टॉल पर आने वाले हर ट्रैवल एजेंट को राजस्थान पर्यटन की तरफ से प्रचार सामग्री का किट, मोमेंटो और राजस्थानी परंपरानुसार स्वागत सत्कार की व्यवस्था होनी चाहिए।
  10. ट्रैवल मार्ट के दौरान राजस्थानी परंपरानुसार विदेशों के ट्रैवल एजेंटों के साथ एक इंट्रेक्टिव गेट-टू-गैदर होनी चाहिए जिसमें राजस्थान के सांस्कृतिक कलाकारों की जो कि विदेशों में मौजूद होते हैं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राजस्थानी खान पान की व्यवस्था होनी चाहिए।
  11. इस तरह के आयोजनों में राजस्थान के ट्रैवल एजेंटों की संख्या बढ़नी चाहिए, अन्य राज्यों के मुकाबले ऐसे आयोजनों में राजस्थान के केवल पांच सात ट्रैवल एजेंट ही होते हैं ऐसे में वो ज्यादा लोगों को अपनी तरफ आकर्षित नहीं कर पाते हैं।
  12. लास्ट टाइम तक राजस्थान के ट्रैवल एजेंटों की कंपनियों के लोगो लिए जाते हैं। ऐसे में प्रचार सामग्री कैसे तैयार होकर आयोजन में बंटे?
  13. राजस्थान के ट्रैवल एजेंट जो इस तरह के आयोजनों में राजस्थान में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मौजूद रहते हैं उनकी एक मीटिंग पर्यटन विभाग के अधिकारियों को पहले ही लेनी चाहिए। जिसमें पूरी प्लानिंग के बारे चर्चा होनी चाहिए। साथ ही हर दिन की एक समरी शाम को तैयार होनी चाहिए।
  14. पर्यटन विभाग को विदेशी मार्ट में आने वाले हर ट्रैवल एजेंट का डाटा रखना चाहिए जिसमें उसके बारे में सारी जानकारी हो और मार्केटिंग विभाग की ओर से समय समय पर इन ट्रैवल एजेंटों से राजस्थान आने वाले पर्यटकों के बारे में मीटिंग्स करनी चाहिए और फोलोअप करना चाहिए।
  15. और सबसे महत्वपूर्ण बात कि पर्यटन के अधिकारियों को राजस्थान लौटने पर एक डाटा साथ लेकर पहुंचना चाहिए जिस पर रिव्यू होना चाहिए।

इसके अलावा और भी कई चीजें है जो राजस्थान पर्यटन विभाग को करनी चाहिए राजस्थान में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए ।

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केरल और थाइलैंड से सीखने की जरूरत: मॉडल, मैनेजमेंट और मार्केटिंग

आपको बता दें कि इस तरह के आयोजनों में पर्यटन क्षेत्र में केरल और थाइलैंड का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। इनकी स्टॉल्स पर बड़ी संख्या में एजेंट मौजूद रहते हैं, जो अपने-अपने उत्पादों को आक्रामक तरीके से प्रमोट करते हैं। शायद यही वजह है कि भारत में पर्यटकों की दृष्टि से केरल शीर्ष पर है और थाइलैंड वैश्विक स्तर पर अग्रणी गंतव्यों में शामिल है।

राजस्थान में ट्रेवल एजेंटों से एक लाख रुपये तक लेकर स्टॉल तो उपलब्ध करा दिए जाते हैं, लेकिन सुविधाएं सीमित रहती हैं। विभाग को चाहिए कि आयोजन से पहले एजेंटों के साथ बैठकें कर एजेंडा तय करे, मार्केटिंग प्लान साझा करे और आयोजन के बाद ठोस फॉलोअप सुनिश्चित करे।

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हर विदेशी एजेंट का डेटा एकत्र कर नियमित संवाद और समीक्षा बैठकें आयोजित की जानी चाहिए। अधिकारियों को विदेश से लौटते समय केवल यात्रा अनुभव नहीं, बल्कि ठोस आंकड़े और संभावित सौदों की सूची साथ लानी चाहिए, जिन पर विभागीय स्तर पर रिव्यू हो।

बहरहाल अब देखना ये होगा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव के सवाल को पर्यटन विभाग एक सीख और चुनौती की तरह लेता है और राजस्थान पर्यटन में चार चांद लगाने की दिशा में काम करते हुए 3 मार्च से शुरु हो रहे ITB बर्लिन में राजस्थान की स्थिति को इन सुझावों के साथ और मजबूत कर पाता है या फिर वही “ढाक के तीन पात” वाली स्थिति रहती है। आपको बता दें कि इस बार ITB बर्लिन में राजस्थान पर्यटन विभाग को प्रतिनिधित्व करने राजस्थान पर्यटन आयुक्त रुक्मणि रियाड़, अतिरिक्त निदेशक पवन जैन और संयुक्त निदेशक पुनीता सिंह बर्लिन दौरे पर गई हैं।

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