PMKVY 4.0 से दुग्ध उत्पादकों की खुलेगी राष्ट्रीय स्तर के एंटरप्रेन्योर बनने की राह
19 हजार दुग्ध उत्पादक बनेंगे ‘डेयरी फार्मर–एंटरप्रेन्योर’, जनजाति क्षेत्रों पर विशेष फोकस
गोपाल सखी योजना से ग्रामीण महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर
सरस मिनी मार्ट से खुलेगा रिटेल एंटरप्रेन्योरशिप का रास्ता
संदीप,
जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान में दुग्ध उत्पादन को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर एक संगठित, लाभकारी और उद्यमशील व्यवसाय के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 4.0) के अंतर्गत राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) से जुड़े 19,000 से अधिक दुग्ध उत्पादकों को राष्ट्रीय स्तर के डेयरी फार्मर–एंटरप्रेन्योर के रूप में तैयार किया जाएगा। यह राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के संरक्षण में संचालित होगा।
PMKVY 4.0 से बदलेगा डेयरी सेक्टर का स्वरूप
जयपुर, 7 फरवरी। राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) से संबद्ध पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से PMKVY 4.0 के तहत एक महत्वाकांक्षी प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है। इस कार्यक्रम में पुरुष एवं महिला पशुपालकों को समान अवसर देते हुए उन्हें आधुनिक डेयरी तकनीक, प्रबंधन कौशल, उद्यमिता विकास और व्यवसायिक दृष्टिकोण से प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित न रखकर डेयरी को दीर्घकालिक और प्रतिस्पर्धी व्यवसायिक इकाई के रूप में स्थापित करना है।
जनजाति क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनजाति बहुल क्षेत्रों के पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वहां स्थानीय रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और कौशल आधारित आजीविका को बढ़ावा मिल सके।
‘गोपाल सखी’ योजना से बदलेगी ग्रामीण महिलाओं की भूमिका
RCDF की प्रबंध संचालक श्रुति भारद्वाज ने बताया कि यह पहल माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की महत्वाकांक्षी “गोपाल सखी” योजना की भावना के अनुरूप है। इस योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मसम्मानयुक्त और सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को “गोपाल सखी” के रूप में तैयार किया जाएगा, जो आगे चलकर पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, व्यवसायिक सलाह और प्रबंधन सहयोग प्रदान करेंगी।
डेयरी प्रबंधन से लेकर वैल्यू एडिशन तक प्रशिक्षण
श्रुति भारद्वाज ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को डेयरी प्रबंधन, पशु आहार तकनीक, दुग्ध गुणवत्ता एवं उत्पादकता और डेयरी उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition) से जुड़ी आधुनिक जानकारी दी जाएगी, जिससे वे बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित कर सकें।
सरस मिनी मार्ट से रिटेल एंटरप्रेन्योरशिप
कार्यक्रम के अंतर्गत सरस ब्रांड के तहत विकसित किए जा रहे “सरस मिनी मार्ट्स” के संचालन के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सेल्स और मार्केटिंग, ग्राहक प्रबंधन, स्टॉक हैंडलिंग और मिनी स्टोर संचालन जैसी व्यावहारिक स्किल्स सिखाई जाएंगी, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें।
सर्कुलर इकोनॉमी से टिकाऊ डेयरी इकोसिस्टम
RCDF की यह पहल डेयरी सेक्टर में सर्कुलर इकोनॉमी, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन और सरस उत्पादों की मार्केट-स्केलिंग की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इसके जरिए प्रदेश में समग्र, संगठित और टिकाऊ डेयरी इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
पशुपालन एवं गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि यह कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और पशुपालकों की आर्थिक और सामाजिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा। उन्होंने इसे दूरगामी, परिवर्तनकारी और ऐतिहासिक पहल बताया।
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