
दो दिवसीय पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग कोर्स में 72 ऑर्थोपेडिक्स स्टूडेंट्स हुए शामिल
गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर में दो दिवसीय पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग कोर्स का आयोजन
ऑर्थोपेडिक्स विभाग और बॉम्बे ऑर्थोपेडिक सोसाइटी का संयुक्त प्रयास
72 पीजी छात्रों सहित देशभर से प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
आधुनिक तकनीकों और क्लिनिकल प्रैक्टिस पर केंद्रित विशेष अकादमिक सत्र
सुश्री सोनिया,
उदयपुर,dusrikhabar.com। गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग एवं बॉम्बे ऑर्थोपेडिक सोसाइटी (BOS) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग कोर्स का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राजस्थान के 72 पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों सहित देशभर से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कोर्स का उद्देश्य उभरते चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों, नवीन उपचार पद्धतियों और क्लिनिकल निर्णय क्षमता में मजबूत बनाना रहा।
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PG टीचिंग का उद्देश्य भविष्य के डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा ज्ञान से जोड़ना: अंकित अग्रवाल
दो दिवसीय यह पोस्ट ग्रेजुएट टीचिंग कोर्स युवा चिकित्सकों के लिए अत्यंत लाभदायक रहा। कार्यक्रम में देशभर से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई। गीतांजली ग्रुप के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अंकित अग्रवाल ने बताया कि ऐसे अकादमिक कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित होते रहेंगे ताकि आने वाली पीढ़ी के चिकित्सक पूरी तरह पारंगत हों और उन्नत तकनीकों का प्रयोग सीखकर रोगियों को बेहतर उपचार दे सकें।
उन्होंने कहा कि पोस्टग्रेजुएट टीचिंग का उद्देश्य भविष्य के डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा ज्ञान से जोड़ना है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे उच्च स्तरीय उपचार प्रदान कर सकें।
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ऑर्थोपेडिक्स विशेषज्ञों ने दिए आधुनिक तकनीकों पर व्यावहारिक सत्र
गीतांजली हॉस्पिटल के वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. हरप्रीत सिंह और डॉ. रामावतार सैनी ने ऑर्थोपेडिक्स से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत एवं उपयोगी अकादमिक सत्र प्रस्तुत किए। इन सत्रों में प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकें, नवीन उपचार विधियां, सर्जिकल अप्रोच तथा क्लिनिकल निर्णय प्रक्रिया की गहन जानकारी प्राप्त हुई। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से युवा चिकित्सकों की क्षमता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
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इंटरैक्टिव सत्र व केस डिस्कशन से बढ़ा व्यावहारिक ज्ञान
कार्यक्रम के दौरान छात्रों के साथ विभिन्न केस डिस्कशन, विचार-विमर्श, और इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए। इन गतिविधियों से प्रतिभागियों की क्लिनिकल समझ, व्यावहारिक ज्ञान तथा डायग्नॉस्टिक स्किल्स में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
प्रतिभागियों ने बताया कि इस तरह का एक्सपोज़र उनके भविष्य के करियर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर ऑर्थोपेडिक्स जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में।
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