
20 जनवरी को खुलेगा शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज का IPO, ₹1,907 करोड़ का इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका
₹118–₹124 प्राइस बैंड के साथ बुक बिल्डिंग प्रोसेस से आएगा IPO, 22 जनवरी को बंद
एंकर इन्वेस्टर्स के लिए 19 जनवरी को बिडिंग, BSE–NSE पर होगी लिस्टिंग
QIB, NIB, रिटेल और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कोटा
3PL लॉजिस्टिक्स कंपनियों में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी
शैडोफैक्स की व्यापक पहुंच और उच्च वॉल्यूम
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर, dusrikhabar.com। लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर की प्रमुख कंपनी शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड अपना इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को बाजार में उतारने जा रही है। इस IPO का प्राइस बैंड ₹118 से ₹124 प्रति इक्विटी शेयर तय किया गया है। कुल ₹1,907.27 करोड़ के इस इश्यू में फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) दोनों शामिल हैं। कंपनी के शेयरों को BSE और NSE पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है, जिसमें NSE को डेसिग्नेटेड स्टॉक एक्सचेंज बनाया गया है।
IPO का साइज, प्राइस बैंड और लॉट साइज
शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO का कुल ऑफर साइज ₹19,072.69 मिलियन (₹1,907.27 करोड़) है। इसमें ₹10,000 मिलियन (₹1,000 करोड़) का फ्रेश इश्यू, ₹9,072.69 मिलियन (₹907.27 करोड़) का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है।
कंपनी के ₹10 फेस वैल्यू वाले शेयरों का फ्लोर प्राइस फेस वैल्यू का 11.8 गुना, वहीं कैप प्राइस फेस वैल्यू का 12.4 गुना रखा गया है। निवेशकों को कम से कम 120 इक्विटी शेयरों के लिए आवेदन करना होगा और उसके बाद 120 के मल्टीपल में बिड लगानी होगी।
बिडिंग डेट, एंकर इन्वेस्टर्स और लिस्टिंग प्लान
IPO बिडिंग/ऑफर
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खुलने की तारीख: मंगलवार, 20 जनवरी 2026
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बंद होने की तारीख: गुरुवार, 22 जनवरी 2026
एंकर इन्वेस्टर्स के लिए बिडिंग सोमवार, 19 जनवरी 2026 को होगी। इस रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के तहत जारी किए गए शेयरों को BSE और NSE पर लिस्ट किया जाएगा।

बुक रनिंग लीड मैनेजर्स और IPO प्रक्रिया
इस IPO के लिए ICICI Securities Limited, Morgan Stanley India Company Private Limited और JM Financial Limited को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) नियुक्त किया गया है। यह ऑफर SEBI ICDR Regulations और Securities Contracts (Regulation) Rules, 1957 के नियम 19(2)(b) के तहत बुक बिल्डिंग प्रोसेस के माध्यम से लाया जा रहा है।
QIB, एंकर, NIB और रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षण
IPO के नेट ऑफर का कम से कम 75% हिस्सा QIBs (Qualified Institutional Buyers) के लिए आरक्षित होगा।
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QIB हिस्से का 60% तक भाग एंकर इन्वेस्टर्स को विवेकाधीन आधार पर आवंटित किया जा सकता है।
एंकर हिस्से में से 33.33% घरेलू म्यूचुअल फंड्स के लिए और 6.67% लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए आरक्षित रहेगा।
इसके अलावा नेट QIB हिस्से का 5% केवल म्यूचुअल फंड्स के लिए, नेट ऑफर का अधिकतम 15% NIBs (Non-Institutional Bidders) के लिए आरक्षित रहेगा। वहीं 1/3 हिस्सा ₹2 लाख से ₹10 लाख तक, 2/3 हिस्सा ₹10 लाख से अधिक के आवेदन के लिए तो नेट ऑफर का अधिकतम 10% रिटेल व्यक्तिगत निवेशकों के लिए आरक्षित होगा। यदि QIB को न्यूनतम 75% आवंटन नहीं हो पाता है, तो पूरी बोली राशि रिफंड कर दी जाएगी।
कर्मचारियों के लिए आरक्षण और ASBA नियम
कंपनी ने पात्र कर्मचारियों के लिए भी एक अलग आरक्षित हिस्सा रखा है, जिसमें उन्हें आनुपातिक आधार पर शेयर आवंटित किए जाएंगे। एंकर इन्वेस्टर्स को छोड़कर, सभी निवेशकों के लिए ASBA (Application Supported by Blocked Amount) प्रक्रिया के जरिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। यूपीआई निवेशकों को अपनी UPI ID देनी होगी ताकि राशि ब्लॉक की जा सके।

शैडोफैक्स के बारे में ये जानना भी जरूरी है…
शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड भारत की अग्रणी लॉजिस्टिक्स कंपनियों में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है। कंपनी पूरे देशभर में प्रतिदिन करीब 16 लाख ऑर्डर डिलीवर करती है और अब तक 200 करोड़ से अधिक ऑर्डर डिलीवरी का रिकॉर्ड हासिल कर चुकी है। यह उपलब्धि कंपनी की परिचालन क्षमता और मजबूत टेक्नोलॉजी आधारित नेटवर्क को दर्शाती है।
3PL लॉजिस्टिक्स कंपनियों में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी
कंपनी का नेटवर्क देश के 2500 से अधिक शहरों में फैला हुआ है, जिससे छोटे शहरों और दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी तेज और भरोसेमंद डिलीवरी संभव हो पाई है। कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड देश की 3PL लॉजिस्टिक्स कंपनियों में दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है, जो इसे लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक मजबूत स्थान दिलाती है।
शैडोफैक्स की व्यापक पहुंच और उच्च वॉल्यूम
राजस्थान की बात करें तो यहां 210 से अधिक लॉजिस्टिक कंपनियां सक्रिय हैं, लेकिन शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज अपनी व्यापक पहुंच और उच्च वॉल्यूम डिलीवरी के कारण अलग पहचान रखती है। कंपनी के अनुसार, देशभर में रोजाना लगभग 2.4 करोड़ ऑर्डर डिलीवर होते हैं। ई-कॉमर्स सेक्टर में 20–25 प्रतिशत तक कैंसिलेशन होता है, लेकिन इसके बावजूद कंपनियों को डिलीवरी चार्ज मिलता है, जिससे राजस्व स्थिर बना रहता है।
निवेश से पहले क्या पढ़ें?: कंपनी ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे आवेदन से पहले रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) को ध्यान से पढ़ें।
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