
2 साल की बच्ची में रेयर आई कैंसर का ऑप्थैल्मिक आर्टरी कीमोसर्जरी से इलाज
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर में पहली बार हुआ OAC प्रोसीजर
डॉ. मनीष राजपूत और टीम ने बचाई मासूम की रोशनी
टारगेटेड थेरेपी से कम साइड इफेक्ट, तेज रिकवरी और बेहतर परिणाम
जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान में बाल कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए Fortis Escorts Hospital Jaipur ने 2 वर्ष की बच्ची में रेयर आई कैंसर ‘रेटिनोब्लास्टोमा’ का सफल इलाज किया है। यह अस्पताल में किया गया पहला ऑप्थैल्मिक आर्टरी कीमोसर्जरी (OAC) प्रोसीजर है, जिसने न सिर्फ मासूम की जान बचाई बल्कि उसकी बची हुई आंख की रोशनी भी सुरक्षित रखने में मदद की।
इस जटिल प्रक्रिया को वैस्कुलर एवं इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मनीष राजपूत और उनकी विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
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क्या है रेटिनोब्लास्टोमा और क्यों है खतरनाक?
रेटिनोब्लास्टोमा एक दुर्लभ और तेजी से फैलने वाला आई कैंसर है, जो लगभग 18,000 बच्चों में से 1 को प्रभावित करता है। बच्ची का शुरुआती निदान All India Institute of Medical Sciences Delhi में हुआ, जहां पता चला कि उसकी बाईं आंख में कैंसर काफी बढ़ चुका था और जान बचाने के लिए सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचा था।
परिवार इस भावनात्मक आघात से उबर ही रहा था कि फॉलो-अप जांच में सामने आया कि कैंसर दाहिनी आंख को भी प्रभावित करने लगा है, जिससे पूर्ण अंधेपन का खतरा उत्पन्न हो गया। ऐसे में परिवार ने पारंपरिक इलाज से आगे बढ़कर एडवांस्ड विकल्प तलाशे और उन्हें जयपुर में विशेषज्ञ उपचार की सलाह दी गई।
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क्या है ऑप्थैल्मिक आर्टरी कीमोसर्जरी (OAC)?
बच्ची को जयपुर लाकर विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत जांच के बाद ऑप्थैल्मिक आर्टरी कीमोसर्जरी (OAC) का निर्णय लिया। यह एक अत्याधुनिक और कम से कम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें कीमोथेरेपी दवा सीधे उस धमनी (ऑप्थैल्मिक आर्टरी) में पहुंचाई जाती है जो आंख के ट्यूमर को रक्त सप्लाई करती है।
डॉ. मनीष राजपूत के अनुसार: “इस टारगेटेड थेरेपी से ट्यूमर वाली जगह पर दवा का अधिक संकेंद्रण होता है, जिससे सिस्टमिक साइड इफेक्ट कम होते हैं, आंख बचाने और दृष्टि बनाए रखने की संभावना बढ़ती है। रिकवरी तेज होती है और अस्पताल में रहने की अवधि भी कम हो जाती है।” यह प्रोसीजर सफल रहा और बच्ची की शेष आंख की रोशनी बचाने में मददगार साबित हुआ।
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फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल
क्षेत्र में नई उम्मीद की किरण
फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब राजस्थान और आसपास के राज्यों के बच्चों को कटिंग-एज इमेज-गाइडेड थेरेपी घर के पास उपलब्ध है। यह न केवल जीवन बचाती है बल्कि बच्चों की दृष्टि और भविष्य की संभावनाओं को भी सुरक्षित रखती है।
उन्होंने पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम और डॉ. मनीष राजपूत को इस उन्नत आंख बचाने वाली तकनीक को क्षेत्र में लाने के लिए बधाई दी।
हिम्मत, विज्ञान और समय पर इलाज की जीत
एक आंख खोने के दर्द से लेकर पूर्ण अंधेपन के खतरे तक का यह सफर परिवार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन एडवांस्ड मेडिकल साइंस, विशेषज्ञ टीम और समय पर हस्तक्षेप ने इस मासूम को नई उम्मीद दी। यह उपलब्धि केवल एक क्लिनिकल माइलस्टोन नहीं, बल्कि रेटिनोब्लास्टोमा और अन्य जटिल बाल कैंसर से जूझ रहे परिवारों के लिए आशा की नई किरण है।
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