
सांसद-IAS दंपत्ति विवाद राजस्थान में चर्चा का विषय, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव…
उदयपुर सांसद-डूंगरपुर-प्रतापगढ़ आईएएस दंपत्ति विवाद ने पकड़ा तूल
DMF कार्यों को रोकने पर कलेक्टर पर सांसद ने लगाए थे आरोप
दोनों आईएएस दंपत्ति के तबादले के बाद भी खत्म नहीं हुआ विवाद
अंदरखाने IAS लॉबी तैयार कर रही बड़ा प्लान…!
विजय श्रीवास्तव,
उदयपुर, dusrikhabar.com। उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और IAS दंपत्ति के बीच विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। जानकार सूत्रों की मानें तो सांसद मन्नालाल रावत विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे मामला और गरमा गया है।
उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और IAS अधिकारी अंजलि राजोरिया व उनके पति अंकित कुमार सिंह के बीच चल रहा विवाद अब नया रूप लेता दिख रहा है। सांसद रावत ने संकेत दिए हैं कि वे विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। इस मुद्दे पर वे विशेषज्ञों से भी चर्चा कर चुके हैं।
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सांसद का आरोप है कि प्रतापगढ़ कलेक्टर रहते हुए अंजलि राजोरिया ने DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) के तहत स्वीकृत 54 विकास कार्यों को जानबूझकर रोका, जबकि सरकार से वित्तीय मंजूरी मिल चुकी थी। उनके अनुसार केवल 3 कार्यों को ही आगे बढ़ाया गया, जो प्रशासनिक विवेक नहीं बल्कि अहंकार का परिणाम था।
इस मामले को सांसद ने संसद में भी उठाया और कहा कि इस तरह के निर्णय प्रधानमंत्री के विकास विजन को प्रभावित करते हैं। उन्होंने DMF के अध्यक्ष के रूप में सांसद की भूमिका तय करने और मामले की जांच की मांग की। वहीं, सांसद का IAS अंकित कुमार सिंह से भी विवाद रहा है। डूंगरपुर में दिशा समिति की बैठक के दौरान हुए विवाद में कलेक्टर पर हस्तक्षेप न करने का आरोप लगाया गया।
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इसी बीच 1 अप्रैल को जारी राजस्थान IAS ट्रांसफर सूची में अंजलि राजोरिया को गृह विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया, जबकि अंकित कुमार सिंह को फलोदी कलेक्टर नियुक्त किया गया। तबादले के पीछे सांसद की नाराजगी बड़ा कारण माना जा रहा है। हालांकि कलेक्टर बदले और हालात बदल जाने चाहिए लेकिन तबादले के बावजूद सांसद ने साफ किया कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का विकल्प अभी भी खुला है और वे इस मामले में “वेट एंड वॉच” की स्थिति में हैं।
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बहरहाल अगर हालात यही बने रहे तो सांसद और आईएएस दंपत्ति के बीच 36 का आंकड़ा और भी बड़ा रूप ले सकता है। मेवाड़ में ऐसा कहा जाता है कि सांसद अपने अधिकारों के प्रति जागृत हैं और उत्साहित भी वहीं IAS दंपत्ति भी अपने कर्त्तव्य का पालन और प्रदेश हित में कार्य कर रहे हैं, तबादले के बाद IAS दंपत्ति अपने नए डेस्टीनेशन पर पहुंच चुके हैं लेकिन सांसद की डेस्टीनेशन शायद कहीं और जाकर रूकेगी। आखिर क्या सोच रहे हैं सांसद? ऐसे में अब देखना ये होगा कि इस विरोधाभास का ऊंट किस करवट बैठता है?
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