
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने की मुख्यमंत्री भजनलाल के लिए बड़ी बात, बोले आपका राजनीतिक…
CM भजनलाल शर्मा से जगद्गुरु रामभद्राचार्य बोले— हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार, आपका राजनीतिक क्षितिज उज्ज्वल है
77वें जन्मदिन पर जयपुर में महायज्ञ, मुख्यमंत्री दंपती की मौजूदगी, धर्म–राजनीति की त्रिवेणी का उल्लेख
गलता तीर्थ, गौशाला और तुलसी पीठ पर संवाद, सीएम ने दिया भरोसा—जो कहा, वही होगा
रामलला के बाद काशी–मथुरा, लव जिहाद और पीओके पर मुखर संदेश—अब ओम शांति नहीं, ओम क्रांति का समय
विजय श्रीवास्तव,
जयपुर,dusrikhabar.com। जयपुर में आयोजित 1008 कुण्डीय हनुमान महायज्ञ और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के 77वें जन्मदिन महोत्सव के अवसर पर धर्म, राजनीति और राष्ट्रवाद का संगम देखने को मिला। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी धर्मपत्नी के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा— हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार, आपका राजनीतिक क्षितिज बहुत प्यारा है, सबको सब कहने दीजिए और मस्ती में काम कीजिए।
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सीएम की खुली प्रशंसा: “लंबे समय बाद राजस्थान को ब्राह्मण बालक मुख्यमंत्री मिला”
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय बाद राजस्थान को एक ब्राह्मण बालक मुख्यमंत्री मिला है। मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी दोनों धर्म आचरण वाले हैं और उनका राजनीतिक क्षितिज लंबे समय तक जगमगाएगा।
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उन्होंने कृष्ण दास परिहारी को गलता गादी का अधिपति बताते हुए कहा कि इस त्रिवेणी की सेवा का सौभाग्य मुख्यमंत्री को मिला है और व्यक्तिगत रूप से वे इससे बहुत प्रसन्न हैं। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को संदेश दिया— सबको सब कहने दीजिए, आप मस्ती में काम कीजिए, आपका मंगल होगा।

गलता तीर्थ पर संवाद: “आपने आदेश दिया, काम हो गया”—सीएम का भरोसा
कार्यक्रम के दौरान गलता तीर्थ को लेकर संवाद भी हुआ। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राजस्थान के मुख्यमंत्री कोई अपूर्व घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी जगह से उठे और बोले— महाराज जी, आपने तो आदेश दे दिया है और वह हो भी गया है। आप चिंता मत करिए, गलता तीर्थ बिल्कुल वैसा ही होगा जैसा आपने कहा है।
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इसके साथ ही जयपुर में गौशाला और तुलसी पीठ की स्थापना की इच्छा पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा— महाराज जी, आप जो मन में ठान लेते हैं, वह राम की कृपा से अपने आप हो जाता है।
रामलला के बाद काशी–मथुरा का संदेश, साध्वी ऋतम्भरा की भूमिका
जन्मोत्सव में साध्वी ऋतम्भरा भी जयपुर पहुंचीं। उनके संबोधन के बाद रामभद्राचार्य ने कहा कि 1984 के बाद राम जन्मभूमि आंदोलन छिड़ा, जो तब संभावना की परिकल्पना था। साध्वी ऋतम्भरा में उस समय जो तरंगें थीं, सामूहिक प्रयास से रामलला मिल गए।
उन्होंने आगे कहा— अब हमें काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि मथुरा प्राप्त करनी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जितना विश्वास साध्वी ऋतम्भरा और जनसमूह ने उन पर किया है, जीवन भर उसे निभाएंगे।
लव जिहाद, पीओके और हिंदू स्वाभिमान पर कड़ा रुख
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा— 76 साल हो गए हैं, 100 में 24 साल और बचे हैं, लेकिन काम बहुत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पाक अधिकृत कश्मीर (POK) नहीं मिलता, जब तक हर हिंदू अपने अपमान का बदला लेने में सक्षम नहीं होता और जब तक लव जिहाद से हमारी बहनों की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक वे विश्राम नहीं लेंगे।
उन्होंने इसे इक्कीसवीं शताब्दी को हिंदुओं की शताब्दी बताते हुए कहा कि सहयोग मिला तो हिंदुओं की विजय रथ यात्रा में आगे साध्वी ऋतम्भरा, फिर वे स्वयं होंगे।
“अब ओम शांति नहीं, ओम क्रांति”—मंदिर अधिकारों पर स्पष्ट ऐलान
रामभद्राचार्य ने कहा— ओम शांति–शांति बहुत सुन लिया, अब ओम क्रांति–क्रांति का समय है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण से संदेश साफ है।
उन्होंने आवाहन किया— जहां-जहां हमारे मंदिर होंगे, वहां-वहां हम अपने अधिकार को स्वीकार करेंगे। साथ ही स्पष्ट कहा— भूलकर भी न किसी को छेड़ेंगे हम, और छेड़ने पर किसी को न छोड़ेंगे हम।

सीएम भजनलाल सपत्नीक पहुंचे जगदगुरु को बधाई देने और आशीर्वाद लेने
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