
चित्तौड़गढ़ बनेगा पॉलिथीन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल जिला: आलोक रंजन, पांच VDO को चार्जशीट
चित्तौड़गढ़ कलेक्टर आलोक रंजन का प्लास्टिक के खिलाफ बड़ा अभियान
चित्तौड़गढ़ बनेगा पॉलिथीन-मुक्त
अनुशीला परियोजना’ के तहत 15,000 कपड़े के बैग जिला प्रशासन को सौंपे
सुश्री सोनिया,
चित्तौड़गढ़, dusrikhbar.com। चित्तौड़गढ़ को पॉलिथीन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल जिला बनाने की दिशा में जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने एक ऐतिहासिक और अभिनव कदम उठाया है। इस पहल में महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता अभियान और आत्मनिर्भर भारत की भावना का प्रभावशाली संगम देखने को मिल रहा है।
जिले को सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन से मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजस्थान परमाणु बिजलीघर (RAPS) की ‘अनुशीला परियोजना’ के तहत तैयार किए गए 15,000 कपड़े के बैग जिला प्रशासन को सौंपे गए। यह परियोजना कुल 40,000 कपड़े के बैग उपलब्ध कराएगी, जिनमें से शेष 25,000 बैग शीघ्र प्रदान किए जाएंगे।
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जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने बैग प्राप्त करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ को प्लास्टिक-मुक्त और टूरिस्ट-फ्रेंडली जिला बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। पॉलिथीन के विकल्प के रूप में कपड़े के थैलों का उपयोग न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि जनभागीदारी भी मजबूत करेगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे बाजार जाते समय पॉलिथीन का बहिष्कार करें और कपड़े के थैलों का उपयोग अपनाएं, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुंदर और हरित चित्तौड़गढ़ मिल सके।

चित्तौड़गढ़ कलेक्टर का प्लास्टिक के खिलाफ बड़ा अभियान, कपड़े के बैग चलाएंगे
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
राजस्थान परमाणु बिजलीघर के स्थल निदेशक एवं सीएसआर-एसडी समिति के चेयरमैन दासरी सुब्बा राव ने बताया कि यह पहल स्वच्छता पखवाड़े के तहत पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखकर की गई है। रावतभाटा क्षेत्र के ‘अणुसिमरन’ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित ये बैग जिलेभर में वितरित किए जाएंगे।
सीएसआर एवं एसडी समिति के सदस्य सचिव संजय कांडपाल ने कहा कि यह परियोजना स्थानीय महिलाओं के लिए स्थायी रोजगार का सशक्त माध्यम बन रही है। ‘अणुसिलाई केंद्र’ के माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं इन बैगों का निर्माण कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की ओर बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
पर्यावरण के साथ आत्मनिर्भरता
घरों की चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ रही ये महिलाएं अब न केवल अपने परिवारों, बल्कि पूरे जिले के भविष्य को संवारने में योगदान दे रही हैं। इस अवसर पर उपखंड अधिकारी डॉ. कृति व्यास, तहसीलदार विवेक गरासिया सहित अणुसिमरन केंद्र की महिलाएं उपस्थित रहीं।

रावतभाटा उपखंड कार्यालय औचक निरीक्षण पर कलेक्टर आलोक रंजन
जिला कलेक्टर ने किया रावतभाटा उपखंड कार्यालय का औचक निरीक्षण
जिला कलक्टर आलोक रंजन ने सोमवार को रावतभाटा उपखण्ड कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। जिला कलक्टर ने उपस्थित पंजिका, ई-फाइलिंग प्रणाली, प्रस्थापन कक्ष, स्टोर शाखा एवं न्यायालय (कोर्ट) शाखाओं का निरीक्षण करते हुए रिकॉर्ड संधारण एवं कार्यप्रणाली की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार का प्रकरण लंबित नहीं रखा जाए तथा आमजन से संबंधित कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
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जिला कलक्टर ने कार्यालय समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने, प्रत्येक प्रकरण का रिकॉर्ड सुव्यवस्थित रखने तथा ई-फाइलिंग प्रणाली का अधिकाधिक और प्रभावी उपयोग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के लिए कार्यालयीन प्रक्रियाओं में सतत सुधार आवश्यक है। निरीक्षण के दौरान उपखण्ड अधिकारी डॉ. कीर्ति व्यास सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने स्वामित्व योजना में लापरवाही पर 5 VDO को दी चार्जशीट
स्वामित्व योजना, जो केंद्र और राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजना है, के प्रभावी क्रियान्वयन में लापरवाही सामने आने पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
भारतीय सर्वेक्षण विभाग, जयपुर द्वारा राजस्व ग्रामों के मैप 1.0 जमा कराने हेतु 6 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद पंचायत समिति गंगरार क्षेत्र के पांच ग्राम विकास अधिकारी निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर मैप जमा कराने में विफल रहे।
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इस लापरवाही पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय पाठक ने राजू चारण (ग्राम पंचायत गोवलिया), विक्रम सिंह (ग्राम पंचायत खारखंदा), घनश्याम सिंह (ग्राम पंचायत उण्डवा), अमन हाड़ा (ग्राम पंचायत जोजरों का खेड़ा) और मीना चावला (ग्राम पंचायत बूढ़) के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के नियम 17 के अंतर्गत चार्जशीट जारी की है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और भविष्य में भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
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