नए CJI की बड़ी पहल-अदालतों में आएगा ‘AI युग- तेज़, पारदर्शी, और सक्षम होगी न्याय व्यवस्था…

नए CJI की बड़ी पहल-अदालतों में आएगा ‘AI युग- तेज़, पारदर्शी, और सक्षम होगी न्याय व्यवस्था…

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कोर्ट में पेशी जल्द…!

तेज़, पारदर्शी और सक्षम होगी न्याय व्यवस्था

भारतीय न्यायपालिका में AI को अपनाने की बड़ी तैयारी

लंबित मामलों के पहाड़ को घटाने में AI बनेगा अहम हथियार

केस मैनेजमेंट से लेकर ब्लॉकचेन तक न्याय व्यवस्था में तकनीक की बढ़ती भूमिका

CJI सूर्य कांत बोले-AI से न्यायालयों में लंबित मामलों को निपटाने में मिलेगी नई रफ़्तार

विजय श्रीवास्तव,

नई दिल्ली, dusrikhabar.com।  देश में 5 करोड़ से अधिक लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की सोच के साथ नए मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायपालिका को वैज्ञानिक और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि शोध, ट्रांसक्रिप्शन, डेटा विश्लेषण और प्रशासनिक कार्यों में AI-आधारित उपकरण तेजी से और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकें। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि तकनीक मानव संवेदना और नैतिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अदालत में हाज़िर हो!

53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने शपथ लेने के बाद कहा कि “न्यायपालिका के सभी स्तरों पर लंबित मामलों की चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक और व्यापक दृष्टिकोण आवश्यक है।” उन्होंने इससे पहले भी टिप्पणी की थी कि न्यायपालिका शोध, ट्रांसक्रिप्शन और डेटा एनालिटिक्स के लिए AI-आधारित उपकरणों का उपयोग शुरू कर चुकी है। 

CJI सूर्य कांत ने साफ कहा कि तकनीक मानव निर्णय-क्षमता का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि उसे बेहतर बनाती है। उन्होंने ये भी कहा कि “कानून कोई साधारण एल्गोरिद्म नहीं है, बल्कि यह मानव संवेदना, सहानुभूति, नैतिक विवेक और संदर्भ की समझ का प्रतिबिंब है, जिसे मशीनें दोहरा नहीं सकतीं।”

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न्यायपालिका में AI को बढ़ावा क्यों जरूरी है?

हालांकि अदालतों में तकनीक के इस्तेमाल पर सहमति बढ़ी है, लेकिन इसके स्वरूप, सीमाएं और प्रभाव अभी भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। देश की अदालतों में 5 करोड़ से अधिक लंबित मामले इस चुनौती की भयावहता दिखाते हैं:-

  • जिला व अधीनस्थ अदालतों में 4.3 करोड़ प्रकरण लंबित हैं।

  • हाई कोर्ट्स में करीब 60 लाख प्रकरण पेंडिंग हैं।

  • वहीं सुप्रीम कोर्ट में लगभग 80,000 प्रकरण लंबित चल रहे हैं। 

AI के उपयोग का सबसे बड़ा तर्क यही है कि यह भारी बोझ कम कर सकता है।

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डिजिटल रूप से सक्षम न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति

ई-कोर्ट प्रोजेक्ट और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) न्याय प्रणाली का आधार बन चुके हैं। फिर भी प्रक्रिया संबंधी देरी, प्रशासनिक क्षमता की कमी, मैनुअल कागजी कार्य, अक्षम केस-शेड्यूलिंग, सीमित डिजिटल पहुंच जैसे कारणों से तकनीक का प्रभाव अभी सीमित है।

न्याय व्यवस्था में AI के पांच प्रमुख क्षेत्र

1. केस मैनेजमेंट और शेड्यूलिंग

मशीन-लर्निंग आधारित पूर्वानुमान

  • स्वचालित कॉज़ लिस्ट

  • डायनेमिक शेड्यूलिंग

  • अनावश्यक स्थगन कम होंगे

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2. दस्तावेज़ प्रोसेसिंग और NLP

नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) आधारित—

  • दस्तावेज़ वर्गीकरण

  • ट्रांसलेशन

  • संक्षेपण

  • नोटिस/ज़मानत फॉर्म की AI ड्राफ्टिंग

  • रियल-टाइम स्पीच-टू-टेक्स्ट

3. वर्चुअल कोर्ट और हाइब्रिड सुनवाई

  • केवल ट्रैफिक चालान तक सीमित न रहे

  • ग्रामीण क्षेत्रों में AI संचालित डिजिटल कियोस्क

  • जनरेटिव AI आधारित कानूनी शोध को विस्तार

4. ब्लॉकचेन तकनीक

  • छेड़छाड़-रहित डिजिटल स्टोरेज

  • साक्ष्य की Chain-of-Custody सत्यापन

  • डीपफेक पहचान तकनीक

5. रियल-टाइम एनालिटिक्स

  • बैकलॉग एनालिटिक्स

  • ज्यूडिशियल प्रोडक्टिविटी डैशबोर्ड

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AI को लेकर सावधानी और नैतिक प्रश्न

हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की 2023 की रिपोर्ट “AI, Judges and Judgement: Setting the Scene” कहती है कि “अदालतों में AI के विस्तार को लेकर जनता की सावधानी उपयोगी है। इससे एल्गोरिद्म की जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। AI की क्षमता को अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जिससे गलत धारणा बनती है कि ये मॉडल हमेशा मानव तर्क से श्रेष्ठ होते हैं।”

CJI के सामने रोडमैप: राष्ट्रीय टास्क फोर्स की जरूरत

विशेषज्ञों के अनुसार नए CJI को अदालतों में AI के अवसरों का आकलन, तकनीक-सक्षम न्यायपालिका की कार्ययोजना, जजों, वकीलों, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को जोड़कर, राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन और White Paper तैयार करना चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था आधुनिक, तेज़ और पारदर्शी बन सके।

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