राजस्थान पर्यटन में बड़ा खेला? बिना दफ्तर पोस्टिंग, लाखों का खर्च सवालों में.!

राजस्थान पर्यटन में बड़ा खेला? बिना दफ्तर पोस्टिंग, लाखों का खर्च सवालों में.!

मुंबई जैसे महानगर में राजस्थान पर्यटन का दफ्तर नहीं, फिर भी सालों से अफसर तैनात

दिल्ली-राजस्थान में बिना पद वर्षों से जमे अफसर, प्रमोशन के बाद भी क्यों नहीं ले रहे तबादला पोस्टिंग ?

राजस्थान से बाहर तैनात अधिकारियों के कामकाज पर उठ रहे गंभीर सवाल, 

पर्यटन प्रचार के नाम पर खर्च, लेकिन न फुटफॉल न आउटपुट

जयपुर,dusrikhabar.com। राजस्थान में पर्यटन को लेकर सरकार और विभाग के बड़े-बड़े दावों के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है। राजस्थान पर्यटन विभाग में पर्यटन के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई राज्यों में न तो ढंग का पर्यटन कार्यालय है और न ही पर्यटकों की कोई ठोस गतिविधि। इसके बावजूद वहां अधिकारियों की पोस्टिंग, वेतन और भत्तों का खर्च लगातार जारी है। यह पूरा मामला अब विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

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मुंबई में नहीं राजस्थान पर्यटन का दफ्तर, फिर भी अफसर की पोस्टिंग

जानकार सूत्रों के मुताबिक, देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई में राजस्थान पर्यटन विभाग का कोई आधिकारिक दफ्तर मौजूद नहीं है। इसके बावजूद वहां एक अधिकारी की वर्षों से पोस्टिंग बनी हुई है। हर महीने लाखों रुपये वेतन और भत्तों पर खर्च हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना दफ्तर वह अधिकारी राजस्थान पर्यटन का प्रचार-प्रसार आखिर कहां से और कैसे कर रहा है? इतना ही नहीं, वर्षों से तबादला न होना प्रशासनिक नियमों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

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पांच राज्यों में पर्यटन दफ्तर या सिर्फ पोस्टिंग?

जानकारी के अनुसार राजस्थान पर्यटन विभाग के पांच राज्यों में पर्यटक दफ्तर बताए जाते हैं मुंबई (महाराष्ट्र), अहमदाबाद (गुजरात), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), चेन्नई (तमिलनाडु – फिलहाल बंद) और दिल्ली।

सूत्रों के अनुसार इन जगहों पर न तो पर्यटकों की इन्क्वायरी का फुटफॉल है और न ही कहीं दफ्तर का वास्तविक अस्तित्व, लेकिन अधिकारियों की पोस्टिंग जरूर है।
दिल्ली में तो हालात और भी चौंकाने वाले हैं, जहां प्रमोशन के बाद पोस्टिंग मिलने के बावजूद अफसर ने आज तक ज्वाइन ही नहीं किया और राजस्थान में ही अपनी पदोन्नति का लाभ उठा रहे हैं।

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प्रमोशन किसी और पद पर, काम किसी और जगह!

सूत्रों के अनुसार दिल्ली और अहमदाबाद जैसे शहरों में कुछ अधिकारी प्रमोशन के बाद भी वर्षों से जमे हुए हैं, जबकि वहां उनके लिए कोई स्वीकृत पद ही मौजूद नहीं
इसी तरह राजस्थान में भी ऐसे अधिकारी बताए जा रहे हैं जो पदोन्नति के बाद बिना पद के ही ऊंचे अधिकारियों की सरपरस्ती में लाभ उठा रहे हैं। यह स्थिति नियमों की अनदेखी और साठ-गांठ की ओर इशारा करती है।

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लुट रहा जनता की मेहनत का पैसा?

सबसे अहम सवाल यही है कि जब दफ्तर नहीं है, पर्यटकों की इन्क्वायरी नहीं है, काम का कोई ठोस आउटपुट सामने नहीं है, तो फिर इन अधिकारियों के काम की मॉनिटरिंग कैसे हो रही है? उनके कार्यों का जस्टिफिकेशन कौन और किस आधार पर दे रहा है?

क्या यह सब सरकार की आंखों में धूल झोंककर किया जा रहा है या फिर आलाधिकारियों की शह पर?

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विभागीय आलाधिकारी सवालों के कठघरे में

एक ओर राजस्थान पर्यटन विभाग करोड़ों रुपये प्रचार-प्रसार पर खर्च कर रहा है, दूसरी ओर मुंबई जैसे शहर में दफ्तर के बिना अफसर की पोस्टिंग कई संदेह पैदा करती है।
जरूरत है कि सरकार इन पोस्टिंग्स की स्वतंत्र जांच कराए, पर्यटन कार्यालयों की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यह स्पष्ट करे कि पर्यटन के नाम पर खर्च हो रहा पैसा आखिर किसके हित में है

बहरहाल, जिस पैमाने पर राजस्थान पर्यटन का हल्ला किया जा रहा है, उस अनुपात में न तो पर्यटकों की आवक बढ़ी है और न ही विभागीय खर्चों में कमी आई है। आउटकम क्या है?—यह सवाल आज भी बिना जवाब बना हुआ है।

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